कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२९ / १६३ № 129 of 163 रचना १२९ / १६३
३० मार्च २०१८ 30 March 2018 ३० मार्च २०१८

अग्नि बाण बरसे अम्बर से agni baan barase ambar se अग्नि बाण बरसे अम्बर से

अग्नि-बाण बरसे अम्बर

से

पर श्रम जीवन दौड़ रहा है

डटा हुआ है मंगलू मोची

घने पेड़ के छायाघर

में

आए आज शरण में इसकी

ज़ख्मी जूते भर दुपहर

में

अर्द्ध-वसन खुद, लेकिन उनका

तन सीवन से जोड़ रहा है

देख घाट पर धरमू धोबी

ओसारे पर ननकू नाई

गुमटी पर गुरमुख पनवाड़ी

भट्टी पर हलकू

हलवाई

धूप हुई हैरान, किस तरह

पलटू

agni-baan barase ambar

se

·

par shram jeewan daud rahaa hai

·

dataa huaa hai mangaloo mochee

·

ghane ped ke chaayaaghar

men

·

aae aaj sharan men isakee

·

zakhmee joote bhar dupahar

men

·

arddh-wasan khud, lekin unakaa

·

tan seewan se jod rahaa hai

·

dekh ghaat par dharamoo dhobee

·

osaare par nanakoo naaee

·

gumatee par guramukh panawaadee

·

bhattee par halakoo

halawaaee

·

dhoop huee hairaan, kis tarah

·

palatoo

अग्नि-बाण बरसे अम्बर

से

पर श्रम जीवन दौड़ रहा है

डटा हुआ है मंगलू मोची

घने पेड़ के छायाघर

में

आए आज शरण में इसकी

ज़ख्मी जूते भर दुपहर

में

अर्द्ध-वसन खुद, लेकिन उनका

तन सीवन से जोड़ रहा है

देख घाट पर धरमू धोबी

ओसारे पर ननकू नाई

गुमटी पर गुरमुख पनवाड़ी

भट्टी पर हलकू

हलवाई

धूप हुई हैरान, किस तरह

पलटू

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗