जंगलों में jangalon men जंगलों में
सोच में डूबा हुआ मन
जब उतरता जंगलों में।
वे हरे जीवन भरे दिन
याद करता जंगलों में।
कल जहाँ तरुवर खड़े थे
ठूँठ दिखते उस जगह।
रात रहती है वहाँ केवल
नहीं होती सुबह।
और कोई एक दीपक
भी न धरता जंगलों में।
घर से ले जातीं मुझे थीं
जो वहाँ पगडंडियाँ।
अब चुरातीं हैं नज़र
कैसे करें हालत बयाँ
जानती हूँ मैं मगर,
हर प्राण डरता
soch men doobaa huaa man
jab utarataa jangalon men
we hare jeewan bhare din
yaad karataa jangalon men
kal jahaan taruwar khade the
thoonth dikhate us jagah
raat rahatee hai wahaan kewal
naheen hotee subah
aur koee ek deepak
bhee n dharataa jangalon men
ghar se le jaateen mujhe theen
jo wahaan pagadandiyaan
ab churaateen hain nazar
kaise karen haalat bayaan
jaanatee hoon main magar,
har praan darataa
सोच में डूबा हुआ मन
जब उतरता जंगलों में।
वे हरे जीवन भरे दिन
याद करता जंगलों में।
कल जहाँ तरुवर खड़े थे
ठूँठ दिखते उस जगह।
रात रहती है वहाँ केवल
नहीं होती सुबह।
और कोई एक दीपक
भी न धरता जंगलों में।
घर से ले जातीं मुझे थीं
जो वहाँ पगडंडियाँ।
अब चुरातीं हैं नज़र
कैसे करें हालत बयाँ
जानती हूँ मैं मगर,
हर प्राण डरता