कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८० / १६३ № 80 of 163 रचना ८० / १६३
१९ सितम्बर २०१४ 19 September 2014 १९ सितम्बर २०१४

जंगलों में jangalon men जंगलों में

सोच में डूबा हुआ मन

जब उतरता जंगलों में।

वे हरे जीवन भरे दिन

याद करता जंगलों में।

कल जहाँ तरुवर खड़े थे

ठूँठ दिखते उस जगह।

रात रहती है वहाँ केवल

नहीं होती सुबह।

और कोई एक दीपक

भी न धरता जंगलों में।

घर से ले जातीं मुझे थीं

जो वहाँ पगडंडियाँ।

अब चुरातीं हैं नज़र

कैसे करें हालत बयाँ

जानती हूँ मैं मगर,

हर प्राण डरता

soch men doobaa huaa man

·

jab utarataa jangalon men

·

we hare jeewan bhare din

·

yaad karataa jangalon men

·

kal jahaan taruwar khade the

·

thoonth dikhate us jagah

·

raat rahatee hai wahaan kewal

·

naheen hotee subah

·

aur koee ek deepak

·

bhee n dharataa jangalon men

·

ghar se le jaateen mujhe theen

·

jo wahaan pagadandiyaan

·

ab churaateen hain nazar

·

kaise karen haalat bayaan

·

jaanatee hoon main magar,

·

har praan darataa

सोच में डूबा हुआ मन

जब उतरता जंगलों में।

वे हरे जीवन भरे दिन

याद करता जंगलों में।

कल जहाँ तरुवर खड़े थे

ठूँठ दिखते उस जगह।

रात रहती है वहाँ केवल

नहीं होती सुबह।

और कोई एक दीपक

भी न धरता जंगलों में।

घर से ले जातीं मुझे थीं

जो वहाँ पगडंडियाँ।

अब चुरातीं हैं नज़र

कैसे करें हालत बयाँ

जानती हूँ मैं मगर,

हर प्राण डरता

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗