हर खुशी तुमसे पिता har khushee tumase pitaa हर खुशी तुमसे पिता
घर
चमन में झिलमिलाती, रोशनी तुमसे पिता
ज़िंदगी
में हमने पाई, हर खुशी तुमसे पिता
छत्र-छाया
में तुम्हारी,
हम पले, खेले, बढ़े
इस
अँगन में प्रेम की,
गंगा बही तुमसे पिता
गर्व
से चलना सिखाया, तुमने उँगली थामकर
ज़िंदगी
पल-पल पुलक से, है भरी तुमसे पिता
याद
हैं बचपन की बातें, जागती रातें मृदुल
ज्ञान
की हर बात जब, हमने सुनी तुमसे पिता
प्रेरणा
भयमुक्त जीवन की, सदा हमको मिली
नित
नया उत्साह भरती, हर घड़ी तुमसे पिता
हाथ
माथे है तुम्हारा, हम बड़े हैं खुशनसीब
घर-गृहस्थी
में घुली है, माधुरी तुमसे पिता
हर
बला से दूर रखता, बल तुम्हारा ही हमें
‘कल्पना’ जग में सुरक्षा, है
मिली तुमसे पिता
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
ghar
chaman men jhilamilaatee, roshanee tumase pitaa
zindagee
men hamane paaee, har khushee tumase pitaa
chatr-chaayaa
men tumhaaree,
ham pale, khele, bढ़e
is
angan men prem kee,
gangaa bahee tumase pitaa
garv
se chalanaa sikhaayaa, tumane ungalee thaamakar
zindagee
pal-pal pulak se, hai bharee tumase pitaa
yaad
hain bachapan kee baaten, jaagatee raaten mriidul
jnaan
kee har baat jab, hamane sunee tumase pitaa
preranaa
bhayamukt jeewan kee, sadaa hamako milee
nit
nayaa utsaah bharatee, har ghadee tumase pitaa
haath
maathe hai tumhaaraa, ham bade hain khushanaseeb
ghar-griihasthee
men ghulee hai, maadhuree tumase pitaa
har
balaa se door rakhataa, bal tumhaaraa hee hamen
‘kalpanaa’ jag men surakshaa, hai
milee tumase pitaa
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
घर
चमन में झिलमिलाती, रोशनी तुमसे पिता
ज़िंदगी
में हमने पाई, हर खुशी तुमसे पिता
छत्र-छाया
में तुम्हारी,
हम पले, खेले, बढ़े
इस
अँगन में प्रेम की,
गंगा बही तुमसे पिता
गर्व
से चलना सिखाया, तुमने उँगली थामकर
ज़िंदगी
पल-पल पुलक से, है भरी तुमसे पिता
याद
हैं बचपन की बातें, जागती रातें मृदुल
ज्ञान
की हर बात जब, हमने सुनी तुमसे पिता
प्रेरणा
भयमुक्त जीवन की, सदा हमको मिली
नित
नया उत्साह भरती, हर घड़ी तुमसे पिता
हाथ
माथे है तुम्हारा, हम बड़े हैं खुशनसीब
घर-गृहस्थी
में घुली है, माधुरी तुमसे पिता
हर
बला से दूर रखता, बल तुम्हारा ही हमें
‘कल्पना’ जग में सुरक्षा, है
मिली तुमसे पिता
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी