कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ५६ / २०४ № 56 of 204 रचना ५६ / २०४
१६ सितम्बर २०१४ 16 September 2014 १६ सितम्बर २०१४

हर खुशी तुमसे पिता har khushee tumase pitaa हर खुशी तुमसे पिता

घर

चमन में झिलमिलाती, रोशनी तुमसे पिता

ज़िंदगी

में हमने पाई, हर खुशी तुमसे पिता

छत्र-छाया

में तुम्हारी,

हम पले, खेले, बढ़े

इस

अँगन में प्रेम की,

गंगा बही तुमसे पिता

गर्व

से चलना सिखाया, तुमने उँगली थामकर

ज़िंदगी

पल-पल पुलक से, है भरी तुमसे पिता

याद

हैं बचपन की बातें, जागती रातें मृदुल

ज्ञान

की हर बात जब, हमने सुनी तुमसे पिता

प्रेरणा

भयमुक्त जीवन की, सदा हमको मिली

नित

नया उत्साह भरती, हर घड़ी तुमसे पिता

हाथ

माथे है तुम्हारा, हम बड़े हैं खुशनसीब

घर-गृहस्थी

में घुली है, माधुरी तुमसे पिता

हर

बला से दूर रखता, बल तुम्हारा ही हमें

‘कल्पना’ जग में सुरक्षा, है

मिली तुमसे पिता

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

ghar

chaman men jhilamilaatee, roshanee tumase pitaa

·

zindagee

men hamane paaee, har khushee tumase pitaa

·

chatr-chaayaa

men tumhaaree,

ham pale, khele, bढ़e

·

is

angan men prem kee,

gangaa bahee tumase pitaa

·

garv

se chalanaa sikhaayaa, tumane ungalee thaamakar

·

zindagee

pal-pal pulak se, hai bharee tumase pitaa

·

yaad

hain bachapan kee baaten, jaagatee raaten mriidul

·

jnaan

kee har baat jab, hamane sunee tumase pitaa

·

preranaa

bhayamukt jeewan kee, sadaa hamako milee

·

nit

nayaa utsaah bharatee, har ghadee tumase pitaa

·

haath

maathe hai tumhaaraa, ham bade hain khushanaseeb

·

ghar-griihasthee

men ghulee hai, maadhuree tumase pitaa

·

har

balaa se door rakhataa, bal tumhaaraa hee hamen

·

‘kalpanaa’ jag men surakshaa, hai

milee tumase pitaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

घर

चमन में झिलमिलाती, रोशनी तुमसे पिता

ज़िंदगी

में हमने पाई, हर खुशी तुमसे पिता

छत्र-छाया

में तुम्हारी,

हम पले, खेले, बढ़े

इस

अँगन में प्रेम की,

गंगा बही तुमसे पिता

गर्व

से चलना सिखाया, तुमने उँगली थामकर

ज़िंदगी

पल-पल पुलक से, है भरी तुमसे पिता

याद

हैं बचपन की बातें, जागती रातें मृदुल

ज्ञान

की हर बात जब, हमने सुनी तुमसे पिता

प्रेरणा

भयमुक्त जीवन की, सदा हमको मिली

नित

नया उत्साह भरती, हर घड़ी तुमसे पिता

हाथ

माथे है तुम्हारा, हम बड़े हैं खुशनसीब

घर-गृहस्थी

में घुली है, माधुरी तुमसे पिता

हर

बला से दूर रखता, बल तुम्हारा ही हमें

‘कल्पना’ जग में सुरक्षा, है

मिली तुमसे पिता

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗