कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५३ / ६७ № 53 of 67 रचना ५३ / ६७
१४ सितम्बर २०१४ 14 September 2014 १४ सितम्बर २०१४

हिन्दी के सम्मान में hindee ke sammaan men हिन्दी के सम्मान में

देवों से हमको मिला, संस्कृत का

उपहार।

॥

देवनागरी तब बनी, संस्कृति

का आधार।

॥

युग पुरुषों ने तो रचे, हिन्दी में

बहु छंद।

॥

पर नवयुग की पौध ने, किए कोश सब

बंद।

॥

वेद ऋचाओं का नहीं, हुआ उचित

सम्मान।

॥

हिन्द पुत्र भूले सभी, हिन्दी का

रसपान।

॥

जो हिन्दी के पक्षधर, किसे

सुनाएँ पीर।

॥

अपनों के ही हाथ से, टूटा है

प्राचीर।

॥

हिन्दी का कर थामकर, ‘कल’ ने जीती&

dewon se hamako milaa, sanskriit kaa

upahaar

·

dewanaagaree tab banee, sanskriiti

kaa aadhaar

·

yug purushon ne to rache, hindee men

bahu chand

·

par nawayug kee paudh ne, kie kosh sab

band

·

wed riichaaon kaa naheen, huaa uchit

sammaan

·

hind putr bhoole sabhee, hindee kaa

rasapaan

·

jo hindee ke pakshadhar, kise

sunaaen peer

·

apanon ke hee haath se, tootaa hai

praacheer

·

hindee kaa kar thaamakar, ‘kal’ ne jeetee&

देवों से हमको मिला, संस्कृत का

उपहार।

॥

देवनागरी तब बनी, संस्कृति

का आधार।

॥

युग पुरुषों ने तो रचे, हिन्दी में

बहु छंद।

॥

पर नवयुग की पौध ने, किए कोश सब

बंद।

॥

वेद ऋचाओं का नहीं, हुआ उचित

सम्मान।

॥

हिन्द पुत्र भूले सभी, हिन्दी का

रसपान।

॥

जो हिन्दी के पक्षधर, किसे

सुनाएँ पीर।

॥

अपनों के ही हाथ से, टूटा है

प्राचीर।

॥

हिन्दी का कर थामकर, ‘कल’ ने जीती&

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗