कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५८ / ६५ № 58 of 65 रचना ५८ / ६५
२२ अगस्त २०१५ 22 August 2015 २२ अगस्त २०१५

दीनों की दुनिया अलग deenon kee duniyaa alag दीनों की दुनिया अलग

दीनों की दुनिया अलग, होती

सबसे खास।

आशाओं की पोटली, रहती

इनके पास।

चाहे खरपतवार हो, या बिखरे

हों शूल।

हर विपदा के बाग में, खिलते

ये बनफूल।

बाधाओं की बाढ़ में, जीवन

हो दुश्वार।

थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत

की पतवार।

छूटे चाहे आशियाँ, या

रूठे तकदीर।

मगर नहीं है टूटता, इनके

मन का धीर।

शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत।

बारिश भी इनके लिए, कब

लिखती

deenon kee duniyaa alag, hotee

sabase khaas

·

aashaaon kee potalee, rahatee

inake paas

·

chaahe kharapatawaar ho, yaa bikhare

hon shool

·

har wipadaa ke baag men, khilate

ye banaphool

·

baadhaaon kee baaढ़ men, jeewan

ho dushvaar

·

thaame rahate kintu ye, himmat

kee patawaar

·

choote chaahe aashiyaan, yaa

roothe takadeer

·

magar naheen hai tootataa, inake

man kaa dheer

·

sheet, taap, himapaat ko, sahaj maanate meet

·

baarish bhee inake lie, kab

likhatee

दीनों की दुनिया अलग, होती

सबसे खास।

आशाओं की पोटली, रहती

इनके पास।

चाहे खरपतवार हो, या बिखरे

हों शूल।

हर विपदा के बाग में, खिलते

ये बनफूल।

बाधाओं की बाढ़ में, जीवन

हो दुश्वार।

थामे रहते किन्तु ये, हिम्मत

की पतवार।

छूटे चाहे आशियाँ, या

रूठे तकदीर।

मगर नहीं है टूटता, इनके

मन का धीर।

शीत, ताप, हिमपात को, सहज मानते मीत।

बारिश भी इनके लिए, कब

लिखती

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗