कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५९ / ६५ № 59 of 65 रचना ५९ / ६५
२४ अगस्त २०१५ 24 August 2015 २४ अगस्त २०१५

शैशव को बस चाहिए shaishaw ko bas chaahie शैशव को बस चाहिए

शैशव को बस चाहिए, सहज

स्नेह की डोर।

चल देता है बेखबर, नव जीवन

की ओर।

हर शिशु चलना सीखता, थाम

बड़ों का हाथ।

नई पुरानी पौध का, जनम-जनम

का साथ।

शिशु के कोमल स्पर्श से, होते

वृद्ध प्रसन्न।

खुद को ही वे मानते, दुनिया

में सम्पन्न।

वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।

नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले

आपके संग।

भोला बचपन भेद से, होता है

अनजान।

मुसकानें है बाँटता, सबको एक

shaishaw ko bas chaahie, sahaj

sneh kee dor

·

chal detaa hai bekhabar, naw jeewan

kee or

·

har shishu chalanaa seekhataa, thaam

badon kaa haath

·

naee puraanee paudh kaa, janam-janam

kaa saath

·

shishu ke komal sparsh se, hote

wriiddh prasann

·

khud ko hee we maanate, duniyaa

men sampann

·

wriiddhaawasthaa kaa yahee, sabase sukhad prasang

·

nanhaan shishu kar thaam jab, chale

aapake sang

·

bholaa bachapan bhed se, hotaa hai

anajaan

·

musakaanen hai baantataa, sabako ek

शैशव को बस चाहिए, सहज

स्नेह की डोर।

चल देता है बेखबर, नव जीवन

की ओर।

हर शिशु चलना सीखता, थाम

बड़ों का हाथ।

नई पुरानी पौध का, जनम-जनम

का साथ।

शिशु के कोमल स्पर्श से, होते

वृद्ध प्रसन्न।

खुद को ही वे मानते, दुनिया

में सम्पन्न।

वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।

नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले

आपके संग।

भोला बचपन भेद से, होता है

अनजान।

मुसकानें है बाँटता, सबको एक

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗