शैशव को बस चाहिए shaishaw ko bas chaahie शैशव को बस चाहिए
शैशव को बस चाहिए, सहज
स्नेह की डोर।
चल देता है बेखबर, नव जीवन
की ओर।
हर शिशु चलना सीखता, थाम
बड़ों का हाथ।
नई पुरानी पौध का, जनम-जनम
का साथ।
शिशु के कोमल स्पर्श से, होते
वृद्ध प्रसन्न।
खुद को ही वे मानते, दुनिया
में सम्पन्न।
वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।
नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले
आपके संग।
भोला बचपन भेद से, होता है
अनजान।
मुसकानें है बाँटता, सबको एक
shaishaw ko bas chaahie, sahaj
sneh kee dor
chal detaa hai bekhabar, naw jeewan
kee or
har shishu chalanaa seekhataa, thaam
badon kaa haath
naee puraanee paudh kaa, janam-janam
kaa saath
shishu ke komal sparsh se, hote
wriiddh prasann
khud ko hee we maanate, duniyaa
men sampann
wriiddhaawasthaa kaa yahee, sabase sukhad prasang
nanhaan shishu kar thaam jab, chale
aapake sang
bholaa bachapan bhed se, hotaa hai
anajaan
musakaanen hai baantataa, sabako ek
शैशव को बस चाहिए, सहज
स्नेह की डोर।
चल देता है बेखबर, नव जीवन
की ओर।
हर शिशु चलना सीखता, थाम
बड़ों का हाथ।
नई पुरानी पौध का, जनम-जनम
का साथ।
शिशु के कोमल स्पर्श से, होते
वृद्ध प्रसन्न।
खुद को ही वे मानते, दुनिया
में सम्पन्न।
वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।
नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले
आपके संग।
भोला बचपन भेद से, होता है
अनजान।
मुसकानें है बाँटता, सबको एक