कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६१ / ६७ № 61 of 67 रचना ६१ / ६७
२४ अगस्त २०१५ 24 August 2015 २४ अगस्त २०१५

शैशव को बस चाहिए shaishaw ko bas chaahie शैशव को बस चाहिए

शैशव को बस चाहिए, सहज

स्नेह की डोर।

॥

चल देता है बेखबर, नव जीवन

की ओर।

॥

हर शिशु चलना सीखता, थाम

बड़ों का हाथ।

॥

नई पुरानी पौध का, जनम-जनम

का साथ।

॥

शिशु के कोमल स्पर्श से, होते

वृद्ध प्रसन्न।

॥

खुद को ही वे मानते, दुनिया

में सम्पन्न।

॥

वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।

॥

नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले

आपके संग।

॥

भोला बचपन भेद से, होता है

अनजान।

॥

मुसकानें है बाँटता, सबको एक

shaishaw ko bas chaahie, sahaj

sneh kee dor

·

chal detaa hai bekhabar, naw jeewan

kee or

·

har shishu chalanaa seekhataa, thaam

badon kaa haath

·

naee puraanee paudh kaa, janam-janam

kaa saath

·

shishu ke komal sparsh se, hote

wriiddh prasann

·

khud ko hee we maanate, duniyaa

men sampann

·

wriiddhaawasthaa kaa yahee, sabase sukhad prasang

·

nanhaan shishu kar thaam jab, chale

aapake sang

·

bholaa bachapan bhed se, hotaa hai

anajaan

·

musakaanen hai baantataa, sabako ek

शैशव को बस चाहिए, सहज

स्नेह की डोर।

॥

चल देता है बेखबर, नव जीवन

की ओर।

॥

हर शिशु चलना सीखता, थाम

बड़ों का हाथ।

॥

नई पुरानी पौध का, जनम-जनम

का साथ।

॥

शिशु के कोमल स्पर्श से, होते

वृद्ध प्रसन्न।

॥

खुद को ही वे मानते, दुनिया

में सम्पन्न।

॥

वृद्धावस्था का यही, सबसे सुखद प्रसंग।

॥

नन्हाँ शिशु कर थाम जब, चले

आपके संग।

॥

भोला बचपन भेद से, होता है

अनजान।

॥

मुसकानें है बाँटता, सबको एक

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗