पुत्र बसा परदेस में putr basaa parades men पुत्र बसा परदेस में
पुत्र बसा परदेस में, पद का चढ़ा बुखार।
सपने अपने ले गया, सात समंदर पार।
माँ के जो अरमान थे, सकल हो गए धूल।
फूल दिये थे पुत्र को, पुत्र दे गया शूल।
सींचा जिसको रक्त से, सेवा की दिन रात।
उसने मन पर मातु के, किया कुठाराघात।
दिनकर सुख देता नहीं, नहीं सुहाती रात।
खुद ही अपने मौन से, करती रहती बात।
आज विदेशी चाह में, युवा हुए मदहोश।
दोषी क्या संतान ही,
putr basaa parades men, pad kaa chढ़aa bukhaar
sapane apane le gayaa, saat samandar paar
maan ke jo aramaan the, sakal ho gae dhool
phool diye the putr ko, putr de gayaa shool
seenchaa jisako rakt se, sewaa kee din raat
usane man par maatu ke, kiyaa kuthaaraaghaat
dinakar sukh detaa naheen, naheen suhaatee raat
khud hee apane maun se, karatee rahatee baat
aaj wideshee chaah men, yuwaa hue madahosh
doshee kyaa santaan hee,
पुत्र बसा परदेस में, पद का चढ़ा बुखार।
सपने अपने ले गया, सात समंदर पार।
माँ के जो अरमान थे, सकल हो गए धूल।
फूल दिये थे पुत्र को, पुत्र दे गया शूल।
सींचा जिसको रक्त से, सेवा की दिन रात।
उसने मन पर मातु के, किया कुठाराघात।
दिनकर सुख देता नहीं, नहीं सुहाती रात।
खुद ही अपने मौन से, करती रहती बात।
आज विदेशी चाह में, युवा हुए मदहोश।
दोषी क्या संतान ही,