कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ४ / ६५ № 4 of 65 रचना ४ / ६५
२२ जुलाई २०१२ 22 July 2012 २२ जुलाई २०१२

पुत्र बसा परदेस में putr basaa parades men पुत्र बसा परदेस में

पुत्र बसा परदेस में, पद का चढ़ा बुखार।

सपने अपने ले गया, सात समंदर पार।

माँ के जो अरमान थे, सकल हो गए धूल।

फूल दिये थे पुत्र को, पुत्र दे गया शूल।

सींचा जिसको रक्त से, सेवा की दिन रात।

उसने मन पर मातु के, किया कुठाराघात।

दिनकर सुख देता नहीं, नहीं सुहाती रात।

खुद ही अपने मौन से, करती रहती बात।

आज विदेशी चाह में, युवा हुए मदहोश।

दोषी क्या संतान ही,

putr basaa parades men, pad kaa chढ़aa bukhaar

sapane apane le gayaa, saat samandar paar

·

maan ke jo aramaan the, sakal ho gae dhool

phool diye the putr ko, putr de gayaa shool

·

seenchaa jisako rakt se, sewaa kee din raat

usane man par maatu ke, kiyaa kuthaaraaghaat

·

dinakar sukh detaa naheen, naheen suhaatee raat

khud hee apane maun se, karatee rahatee baat

·

aaj wideshee chaah men, yuwaa hue madahosh

doshee kyaa santaan hee,

पुत्र बसा परदेस में, पद का चढ़ा बुखार।

सपने अपने ले गया, सात समंदर पार।

माँ के जो अरमान थे, सकल हो गए धूल।

फूल दिये थे पुत्र को, पुत्र दे गया शूल।

सींचा जिसको रक्त से, सेवा की दिन रात।

उसने मन पर मातु के, किया कुठाराघात।

दिनकर सुख देता नहीं, नहीं सुहाती रात।

खुद ही अपने मौन से, करती रहती बात।

आज विदेशी चाह में, युवा हुए मदहोश।

दोषी क्या संतान ही,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗