जनसंख्या की वृद्धि का janasankhyaa kee wriiddhi kaa जनसंख्या की वृद्धि का
जनसंख्या
की वृद्धि का, शहर
झेलते दंश।
नाममात्र
ही रह गया,
प्राणवायु
का अंश।
प्राणवायु
का अंश, सिलसिला हर
दिन जारी
गाँव
शहर की ओर,
बढ़
रहे बारी बारी।
पनपें यदि ग्रामीण, रहे ना दुविधा बाकी।
शहरों
से हो दूर,
वृद्धि
यह जनसंख्या की।
शुद्ध हवा को खा रही, इमारतों की फौज।
रहवासी मजबूर हैं, कर्ताओं की मौज।
कर्ताओं की मौज, कर रहे खूब कमाई
मची हुई है लूट, नहीं होती सुनवाई।
janasankhyaa
kee wriiddhi kaa, shahar
jhelate dansh
naamamaatr
hee rah gayaa,
praanawaayu
kaa ansh
praanawaayu
kaa ansh, silasilaa har
din jaaree
gaanv
shahar kee or,
bढ़
rahe baaree baaree
panapen yadi graameen, rahe naa duwidhaa baakee
shaharon
se ho door,
wriiddhi
yah janasankhyaa kee
shuddh hawaa ko khaa rahee, imaaraton kee phauj
rahawaasee majaboor hain, kartaaon kee mauj
kartaaon kee mauj, kar rahe khoob kamaaee
machee huee hai loot, naheen hotee sunawaaee
जनसंख्या
की वृद्धि का, शहर
झेलते दंश।
नाममात्र
ही रह गया,
प्राणवायु
का अंश।
प्राणवायु
का अंश, सिलसिला हर
दिन जारी
गाँव
शहर की ओर,
बढ़
रहे बारी बारी।
पनपें यदि ग्रामीण, रहे ना दुविधा बाकी।
शहरों
से हो दूर,
वृद्धि
यह जनसंख्या की।
शुद्ध हवा को खा रही, इमारतों की फौज।
रहवासी मजबूर हैं, कर्ताओं की मौज।
कर्ताओं की मौज, कर रहे खूब कमाई
मची हुई है लूट, नहीं होती सुनवाई।