कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २ / ६७ № 2 of 67 रचना २ / ६७
२१ जुलाई २०१२ 21 July 2012 २१ जुलाई २०१२

चलो विहग उस गाँव chalo wihag us gaanv चलो विहग उस गाँव

हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव

॥

जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।

॥

भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल

॥

क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।

॥

राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस

॥

भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।

॥

पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल

॥

नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।

॥

त्याग मोह की माँद को, बढ़

hawaa wishailee ho chalee, chalo wihag us gaanv

·

jahaan svachch aakaash ho, sukhad ghaneree chaanv

·

bhookh bढ़ee hai shahar men , padane lagaa akaal

·

kyaa khaaoge tum, tumhen khaa jaaegaa kaal

·

raahen hain durgam badee, magar n toote aas

·

bhar lo komal pankh men, ek nayaa ullaas

·

ped khade dikhate naheen, kat kat hue nidhaal

·

nayaa need tum dekh lo, ab maaee ke laal

·

tyaag moh kee maand ko, bढ़

हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव

॥

जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।

॥

भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल

॥

क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।

॥

राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस

॥

भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।

॥

पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल

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नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।

॥

त्याग मोह की माँद को, बढ़

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗