चलो विहग उस गाँव chalo wihag us gaanv चलो विहग उस गाँव
हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव
जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।
भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल
क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।
राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस
भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।
पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल
नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।
त्याग मोह की माँद को, बढ़
hawaa wishailee ho chalee, chalo wihag us gaanv
jahaan svachch aakaash ho, sukhad ghaneree chaanv
bhookh bढ़ee hai shahar men , padane lagaa akaal
kyaa khaaoge tum, tumhen khaa jaaegaa kaal
raahen hain durgam badee, magar n toote aas
bhar lo komal pankh men, ek nayaa ullaas
ped khade dikhate naheen, kat kat hue nidhaal
nayaa need tum dekh lo, ab maaee ke laal
tyaag moh kee maand ko, bढ़
हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव
जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।
भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल
क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।
राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस
भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।
पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल
नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।
त्याग मोह की माँद को, बढ़