कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १ / ६५ № 1 of 65 रचना १ / ६५
२१ जुलाई २०१२ 21 July 2012 २१ जुलाई २०१२

चलो विहग उस गाँव chalo wihag us gaanv चलो विहग उस गाँव

हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव

जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।

भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल

क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।

राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस

भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।

पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल

नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।

त्याग मोह की माँद को, बढ़

hawaa wishailee ho chalee, chalo wihag us gaanv

·

jahaan svachch aakaash ho, sukhad ghaneree chaanv

·

bhookh bढ़ee hai shahar men , padane lagaa akaal

·

kyaa khaaoge tum, tumhen khaa jaaegaa kaal

·

raahen hain durgam badee, magar n toote aas

·

bhar lo komal pankh men, ek nayaa ullaas

·

ped khade dikhate naheen, kat kat hue nidhaal

·

nayaa need tum dekh lo, ab maaee ke laal

·

tyaag moh kee maand ko, bढ़

हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव

जहाँ स्वच्छ आकाश हो, सुखद घनेरी छाँव।

भूख बढ़ी है शहर में , पड़ने लगा अकाल

क्या खाओगे तुम, तुम्हें खा जाएगा काल।

राहें हैं दुर्गम बड़ी, मगर न टूटे आस

भर लो कोमल पंख में, एक नया उल्लास।

पेड़ खड़े दिखते नहीं, कट कट हुए निढाल

नया नीड़ तुम देख लो, अब माई के लाल।

त्याग मोह की माँद को, बढ़

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗