कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३ / ६७ № 3 of 67 रचना ३ / ६७
२१ जुलाई २०१२ 21 July 2012 २१ जुलाई २०१२

ढाई अक्षर प्रेम के dhaaee akshar prem ke ढाई अक्षर प्रेम के

ढाई

अक्षर प्रेम के, गूढ

मगर है सार।

॥

एक

शब्द की नींव पर, टिका

हुआ संसार।

॥

प्रेम

तृप्ति का रूप है, प्रेम

अधूरी प्यास।

॥

इसके

मालिक आप हैं, आप

इसीके दास।

॥

प्रेम

न माँगे सम्पदा, और न

माँगे भोग।

॥

जग

बैरी उसके लिए, जिसे

प्रेम का रोग।

॥

प्रेम

अनोखी अगन है, हिय

सुलगे दिन रात।

॥

स्वयं

पतंगा जल मरे, समझ

न आए बात।

॥

प्रेम

न माने नीतियाँ, और न

रीति रिवाज।

॥

प्रेमी

का होता सदा, एक

dhaaee

akshar prem ke, goodh

magar hai saar

·

ek

shabd kee neenv par, tikaa

huaa sansaar

·

prem

triipti kaa roop hai, prem

adhooree pyaas

·

isake

maalik aap hain, aap

iseeke daas

·

prem

n maange sampadaa, aur n

maange bhog

·

jag

bairee usake lie, jise

prem kaa rog

·

prem

anokhee agan hai, hiy

sulage din raat

·

svayan

patangaa jal mare, samajh

n aae baat

·

prem

n maane neetiyaan, aur n

reeti riwaaj

·

premee

kaa hotaa sadaa, ek

ढाई

अक्षर प्रेम के, गूढ

मगर है सार।

॥

एक

शब्द की नींव पर, टिका

हुआ संसार।

॥

प्रेम

तृप्ति का रूप है, प्रेम

अधूरी प्यास।

॥

इसके

मालिक आप हैं, आप

इसीके दास।

॥

प्रेम

न माँगे सम्पदा, और न

माँगे भोग।

॥

जग

बैरी उसके लिए, जिसे

प्रेम का रोग।

॥

प्रेम

अनोखी अगन है, हिय

सुलगे दिन रात।

॥

स्वयं

पतंगा जल मरे, समझ

न आए बात।

॥

प्रेम

न माने नीतियाँ, और न

रीति रिवाज।

॥

प्रेमी

का होता सदा, एक

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗