कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३ / ६५ № 3 of 65 रचना ३ / ६५
२१ जुलाई २०१२ 21 July 2012 २१ जुलाई २०१२

सुबह की सैर subah kee sair सुबह की सैर

जितनी

सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर

फूल।

रक्षा

कवच बने हुए, साथ

सजे हैं शूल।

अद्भुत

कुदरत की छटा, करती

ह्रदय विभोर।

पुलकित

शबनम से सजी, कितनी

सुंदर भोर!

पंछी

कलरव कर रहे, भँवरे

गुनगुन गान।

दूर

कहीं से आ रही, कुहू

कुहू की तान।

शुद्ध

हवा मन भा रही, ठंडी

ठंडी धूप।

नयनों

को सुख दे रहा, प्रातः

का यह रूप।

झूलों

पर छाया हुआ, किलकारी

का शोर।

नन्हें

बालक बाग में, झूम

रहे चहुं

jitanee

sundar kyaariyaan, utane sundar

phool

·

rakshaa

kawach bane hue, saath

saje hain shool

·

adbhut

kudarat kee chataa, karatee

hraday wibhor

·

pulakit

shabanam se sajee, kitanee

sundar bhor!

·

panchee

kalaraw kar rahe, bhanvare

gunagun gaan

·

door

kaheen se aa rahee, kuhoo

kuhoo kee taan

·

shuddh

hawaa man bhaa rahee, thandee

thandee dhoop

·

nayanon

ko sukh de rahaa, praatah

kaa yah roop

·

jhoolon

par chaayaa huaa, kilakaaree

kaa shor

·

nanhen

baalak baag men, jhoom

rahe chahun

जितनी

सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर

फूल।

रक्षा

कवच बने हुए, साथ

सजे हैं शूल।

अद्भुत

कुदरत की छटा, करती

ह्रदय विभोर।

पुलकित

शबनम से सजी, कितनी

सुंदर भोर!

पंछी

कलरव कर रहे, भँवरे

गुनगुन गान।

दूर

कहीं से आ रही, कुहू

कुहू की तान।

शुद्ध

हवा मन भा रही, ठंडी

ठंडी धूप।

नयनों

को सुख दे रहा, प्रातः

का यह रूप।

झूलों

पर छाया हुआ, किलकारी

का शोर।

नन्हें

बालक बाग में, झूम

रहे चहुं

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗