कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ४ / ६७ № 4 of 67 रचना ४ / ६७
२१ जुलाई २०१२ 21 July 2012 २१ जुलाई २०१२

सुबह की सैर subah kee sair सुबह की सैर

जितनी

सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर

फूल।

॥

रक्षा

कवच बने हुए, साथ

सजे हैं शूल।

॥

अद्भुत

कुदरत की छटा, करती

ह्रदय विभोर।

॥

पुलकित

शबनम से सजी, कितनी

सुंदर भोर!

॥

पंछी

कलरव कर रहे, भँवरे

गुनगुन गान।

॥

दूर

कहीं से आ रही, कुहू

कुहू की तान।

॥

शुद्ध

हवा मन भा रही, ठंडी

ठंडी धूप।

॥

नयनों

को सुख दे रहा, प्रातः

का यह रूप।

॥

झूलों

पर छाया हुआ, किलकारी

का शोर।

॥

नन्हें

बालक बाग में, झूम

रहे चहुं

jitanee

sundar kyaariyaan, utane sundar

phool

·

rakshaa

kawach bane hue, saath

saje hain shool

·

adbhut

kudarat kee chataa, karatee

hraday wibhor

·

pulakit

shabanam se sajee, kitanee

sundar bhor!

·

panchee

kalaraw kar rahe, bhanvare

gunagun gaan

·

door

kaheen se aa rahee, kuhoo

kuhoo kee taan

·

shuddh

hawaa man bhaa rahee, thandee

thandee dhoop

·

nayanon

ko sukh de rahaa, praatah

kaa yah roop

·

jhoolon

par chaayaa huaa, kilakaaree

kaa shor

·

nanhen

baalak baag men, jhoom

rahe chahun

जितनी

सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर

फूल।

॥

रक्षा

कवच बने हुए, साथ

सजे हैं शूल।

॥

अद्भुत

कुदरत की छटा, करती

ह्रदय विभोर।

॥

पुलकित

शबनम से सजी, कितनी

सुंदर भोर!

॥

पंछी

कलरव कर रहे, भँवरे

गुनगुन गान।

॥

दूर

कहीं से आ रही, कुहू

कुहू की तान।

॥

शुद्ध

हवा मन भा रही, ठंडी

ठंडी धूप।

॥

नयनों

को सुख दे रहा, प्रातः

का यह रूप।

॥

झूलों

पर छाया हुआ, किलकारी

का शोर।

॥

नन्हें

बालक बाग में, झूम

रहे चहुं

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗