सुबह की सैर subah kee sair सुबह की सैर
जितनी
सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर
फूल।
रक्षा
कवच बने हुए, साथ
सजे हैं शूल।
अद्भुत
कुदरत की छटा, करती
ह्रदय विभोर।
पुलकित
शबनम से सजी, कितनी
सुंदर भोर!
पंछी
कलरव कर रहे, भँवरे
गुनगुन गान।
दूर
कहीं से आ रही, कुहू
कुहू की तान।
शुद्ध
हवा मन भा रही, ठंडी
ठंडी धूप।
नयनों
को सुख दे रहा, प्रातः
का यह रूप।
झूलों
पर छाया हुआ, किलकारी
का शोर।
नन्हें
बालक बाग में, झूम
रहे चहुं
jitanee
sundar kyaariyaan, utane sundar
phool
rakshaa
kawach bane hue, saath
saje hain shool
adbhut
kudarat kee chataa, karatee
hraday wibhor
pulakit
shabanam se sajee, kitanee
sundar bhor!
panchee
kalaraw kar rahe, bhanvare
gunagun gaan
door
kaheen se aa rahee, kuhoo
kuhoo kee taan
shuddh
hawaa man bhaa rahee, thandee
thandee dhoop
nayanon
ko sukh de rahaa, praatah
kaa yah roop
jhoolon
par chaayaa huaa, kilakaaree
kaa shor
nanhen
baalak baag men, jhoom
rahe chahun
जितनी
सुंदर क्यारियाँ, उतने सुंदर
फूल।
रक्षा
कवच बने हुए, साथ
सजे हैं शूल।
अद्भुत
कुदरत की छटा, करती
ह्रदय विभोर।
पुलकित
शबनम से सजी, कितनी
सुंदर भोर!
पंछी
कलरव कर रहे, भँवरे
गुनगुन गान।
दूर
कहीं से आ रही, कुहू
कुहू की तान।
शुद्ध
हवा मन भा रही, ठंडी
ठंडी धूप।
नयनों
को सुख दे रहा, प्रातः
का यह रूप।
झूलों
पर छाया हुआ, किलकारी
का शोर।
नन्हें
बालक बाग में, झूम
रहे चहुं