कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ६ / ६५ № 6 of 65 रचना ६ / ६५
४ सितम्बर २०१२ 4 September 2012 ४ सितम्बर २०१२

खोए खोए लोग khoe khoe log खोए खोए लोग

जब से आए शहर में,लेकर धन का रोग

यहाँ अकेले हो गए, खोए खोए लोग।

ना तो कोई मित्र है, ना ही रिश्तेदार

और न मिल पाया यहाँ, अपनों का वो प्यार।

सुबह निकलते काम पर, दिन भर बने मशीन

रात गए घर लौटते, थके हुए गमगीन।

सपने तो देखे बड़े, मद में थे तब चूर

रहे हाथ खाली, हुए, स्वजनों से भी दूर।

हालत शहरों की दिखी, गाँवों से बदहाल

घर ऐसे ज्यों घोंसले, सड़कें

jab se aae shahar men,lekar dhan kaa rog

yahaan akele ho gae, khoe khoe log

·

naa to koee mitr hai, naa hee rishtedaar

aur n mil paayaa yahaan, apanon kaa wo pyaar

·

subah nikalate kaam par, din bhar bane masheen

raat gae ghar lautate, thake hue gamageen

·

sapane to dekhe bade, mad men the tab choor

rahe haath khaalee, hue, svajanon se bhee door

·

haalat shaharon kee dikhee, gaanvon se badahaal

ghar aise jyon ghonsale, sadaken

जब से आए शहर में,लेकर धन का रोग

यहाँ अकेले हो गए, खोए खोए लोग।

ना तो कोई मित्र है, ना ही रिश्तेदार

और न मिल पाया यहाँ, अपनों का वो प्यार।

सुबह निकलते काम पर, दिन भर बने मशीन

रात गए घर लौटते, थके हुए गमगीन।

सपने तो देखे बड़े, मद में थे तब चूर

रहे हाथ खाली, हुए, स्वजनों से भी दूर।

हालत शहरों की दिखी, गाँवों से बदहाल

घर ऐसे ज्यों घोंसले, सड़कें

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗