खोए खोए लोग khoe khoe log खोए खोए लोग
जब से आए शहर में,लेकर धन का रोग
यहाँ अकेले हो गए, खोए खोए लोग।
ना तो कोई मित्र है, ना ही रिश्तेदार
और न मिल पाया यहाँ, अपनों का वो प्यार।
सुबह निकलते काम पर, दिन भर बने मशीन
रात गए घर लौटते, थके हुए गमगीन।
सपने तो देखे बड़े, मद में थे तब चूर
रहे हाथ खाली, हुए, स्वजनों से भी दूर।
हालत शहरों की दिखी, गाँवों से बदहाल
घर ऐसे ज्यों घोंसले, सड़कें
jab se aae shahar men,lekar dhan kaa rog
yahaan akele ho gae, khoe khoe log
naa to koee mitr hai, naa hee rishtedaar
aur n mil paayaa yahaan, apanon kaa wo pyaar
subah nikalate kaam par, din bhar bane masheen
raat gae ghar lautate, thake hue gamageen
sapane to dekhe bade, mad men the tab choor
rahe haath khaalee, hue, svajanon se bhee door
haalat shaharon kee dikhee, gaanvon se badahaal
ghar aise jyon ghonsale, sadaken
जब से आए शहर में,लेकर धन का रोग
यहाँ अकेले हो गए, खोए खोए लोग।
ना तो कोई मित्र है, ना ही रिश्तेदार
और न मिल पाया यहाँ, अपनों का वो प्यार।
सुबह निकलते काम पर, दिन भर बने मशीन
रात गए घर लौटते, थके हुए गमगीन।
सपने तो देखे बड़े, मद में थे तब चूर
रहे हाथ खाली, हुए, स्वजनों से भी दूर।
हालत शहरों की दिखी, गाँवों से बदहाल
घर ऐसे ज्यों घोंसले, सड़कें