कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५४ / ६७ № 54 of 67 रचना ५४ / ६७
२३ सितम्बर २०१४ 23 September 2014 २३ सितम्बर २०१४

नवरात्रि के दोहा-मुक्तक navaraatri ke dohaa-muktak नवरात्रि के दोहा-मुक्तक

मेला है नवरात्रि का, फैला परम प्रकाश।

देवी की जयकार से, गूँज उठा आकाश।

माँ प्रतिमा सँग घट सजे, चला जागरण दौर।

आलोकित जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।।

आस्तिकता, विश्वास में, भारत देश कमाल।

गरबा उत्सव की मची, चारों ओर धमाल।

शक्तिमान, अपराजिता, माँ दुर्गा को पूज।

अर्पित कर भाव्याञ्जलि, जन-जन हुआ निहाल।।

बड़े गर्व की बात है, भारत इक परिवार।

आता है जब क्वार का, शुक्ल पक्ष हर बार।

जुटते पूजा पाठ में, भेद भूल सब लोग।

दुर्गा मातु विराजतीं, घर-घर मय शृंगार।।

भक्ति-पूर्ण माहौल का, जब होता निर्माण।

दुष्ट-दुष्टतम रूह भी, बने शुद्धतम प्राण।

जीवन भर हों पाप में, रत चाहे ये लोग।

पर देवी से माँगते, मृत्यु-बाद निर्वाण।।

रमता मन नवरात में, त्याग, भोग-जल-अन्न।

इस विधि होता पर्व ये, नौ दिन में सम्पन्न।

मेले, गरबे, झाँकियाँ, सजते सारी रात।

देवी के आह्वान से, होते सभी प्रसन्न।।

दनुज नहीं तुम हो मनुज, मत भूलो इनसान।

नारी से ही बंधुवर, है आबाद जहान।

देवि-शक्ति माँ रूप है, नारी भव का सार।

मान बढ़ाओ देश का, कर नारी का मान।।

melaa hai navaraatri kaa, phailaa param prakaash

dewee kee jayakaar se, goonj uthaa aakaash

maan pratimaa sang ghat saje, chalaa jaagaran daur

aalokit jeewan huaa, kataa tamas kaa paash

·

aastikataa, wishvaas men, bhaarat desh kamaal

garabaa utsav kee machee, chaaron or dhamaal

shaktimaan, aparaajitaa, maan durgaa ko pooj

arpit kar bhaavyaanjali, jan-jan huaa nihaal

·

bade garv kee baat hai, bhaarat ik pariwaar

aataa hai jab kvaar kaa, shukl paksh har baar

jutate poojaa paath men, bhed bhool sab log

durgaa maatu wiraajateen, ghar-ghar may shriingaar

·

bhakti-poorn maahaul kaa, jab hotaa nirmaan

dusht-dushtatam rooh bhee, bane shuddhatam praan

jeewan bhar hon paap men, rat chaahe ye log

par dewee se maangate, mriityu-baad nirvaan

·

ramataa man navaraat men, tyaag, bhog-jal-ann

is widhi hotaa parv ye, nau din men sampann

mele, garabe, jhaankiyaan, sajate saaree raat

dewee ke aahvaan se, hote sabhee prasann

·

danuj naheen tum ho manuj, mat bhoolo inasaan

naaree se hee bandhuwar, hai aabaad jahaan

dewi-shakti maan roop hai, naaree bhav kaa saar

maan badhaao desh kaa, kar naaree kaa maan

मेला है नवरात्रि का, फैला परम प्रकाश।

देवी की जयकार से, गूँज उठा आकाश।

माँ प्रतिमा सँग घट सजे, चला जागरण दौर।

आलोकित जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।।

आस्तिकता, विश्वास में, भारत देश कमाल।

गरबा उत्सव की मची, चारों ओर धमाल।

शक्तिमान, अपराजिता, माँ दुर्गा को पूज।

अर्पित कर भाव्याञ्जलि, जन-जन हुआ निहाल।।

बड़े गर्व की बात है, भारत इक परिवार।

आता है जब क्वार का, शुक्ल पक्ष हर बार।

जुटते पूजा पाठ में, भेद भूल सब लोग।

दुर्गा मातु विराजतीं, घर-घर मय शृंगार।।

भक्ति-पूर्ण माहौल का, जब होता निर्माण।

दुष्ट-दुष्टतम रूह भी, बने शुद्धतम प्राण।

जीवन भर हों पाप में, रत चाहे ये लोग।

पर देवी से माँगते, मृत्यु-बाद निर्वाण।।

रमता मन नवरात में, त्याग, भोग-जल-अन्न।

इस विधि होता पर्व ये, नौ दिन में सम्पन्न।

मेले, गरबे, झाँकियाँ, सजते सारी रात।

देवी के आह्वान से, होते सभी प्रसन्न।।

दनुज नहीं तुम हो मनुज, मत भूलो इनसान।

नारी से ही बंधुवर, है आबाद जहान।

देवि-शक्ति माँ रूप है, नारी भव का सार।

मान बढ़ाओ देश का, कर नारी का मान।।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗