मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक maan bढ़aao desh kaa kar naaree kaa maan /dohaa muktak मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक
मेला
है नवरात्रि का,
फैला परम प्रकाश।
देवी
की जयकार से,
गूँज उठा आकाश।
माँ
प्रतिमा सँग घट सजे,
चला जागरण दौर।
आलोकित
जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।
गरबा
उत्सव की मची,
चारों ओर धमाल।
आस्तिकता, विश्वास
में, भारत देश कमाल।
शक्तिमान, अपराजिता,
माँ दुर्गा को पूज।
अर्पित
कर भाव्यांजली,
जन-जन हुआ निहाल।
आता
है जब क्वार का,
शुक्ल पक्ष हर बार। &
melaa
hai nawaraatri kaa,
phailaa param prakaash
dewee
kee jayakaar se,
goonj uthaa aakaash
maan
pratimaa sang ghat saje,
chalaa jaagaran daur
aalokit
jeewan huaa, kataa tamas kaa paash
garabaa
utsaw kee machee,
chaaron or dhamaal
aastikataa, wishvaas
men, bhaarat desh kamaal
shaktimaan, aparaajitaa,
maan durgaa ko pooj
arpit
kar bhaavyaanjalee,
jan-jan huaa nihaal
aataa
hai jab kvaar kaa,
shukl paksh har baar &
मेला
है नवरात्रि का,
फैला परम प्रकाश।
देवी
की जयकार से,
गूँज उठा आकाश।
माँ
प्रतिमा सँग घट सजे,
चला जागरण दौर।
आलोकित
जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।
गरबा
उत्सव की मची,
चारों ओर धमाल।
आस्तिकता, विश्वास
में, भारत देश कमाल।
शक्तिमान, अपराजिता,
माँ दुर्गा को पूज।
अर्पित
कर भाव्यांजली,
जन-जन हुआ निहाल।
आता
है जब क्वार का,
शुक्ल पक्ष हर बार। &