कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५५ / ६७ № 55 of 67 रचना ५५ / ६७
२४ सितम्बर २०१४ 24 September 2014 २४ सितम्बर २०१४

मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक maan bढ़aao desh kaa kar naaree kaa maan /dohaa muktak मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक

मेला

है नवरात्रि का,

फैला परम प्रकाश।

॥

देवी

की जयकार से,

गूँज उठा आकाश।

॥

माँ

प्रतिमा सँग घट सजे,

चला जागरण दौर।

॥

आलोकित

जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।

॥

गरबा

उत्सव की मची,

चारों ओर धमाल।

॥

आस्तिकता, विश्वास

में, भारत देश कमाल।

॥

शक्तिमान, अपराजिता,

माँ दुर्गा को पूज।

॥

अर्पित

कर भाव्यांजली,

जन-जन हुआ निहाल।

॥

आता

है जब क्वार का,

शुक्ल पक्ष हर बार। &

melaa

hai nawaraatri kaa,

phailaa param prakaash

·

dewee

kee jayakaar se,

goonj uthaa aakaash

·

maan

pratimaa sang ghat saje,

chalaa jaagaran daur

·

aalokit

jeewan huaa, kataa tamas kaa paash

·

garabaa

utsaw kee machee,

chaaron or dhamaal

·

aastikataa, wishvaas

men, bhaarat desh kamaal

·

shaktimaan, aparaajitaa,

maan durgaa ko pooj

·

arpit

kar bhaavyaanjalee,

jan-jan huaa nihaal

·

aataa

hai jab kvaar kaa,

shukl paksh har baar &

मेला

है नवरात्रि का,

फैला परम प्रकाश।

॥

देवी

की जयकार से,

गूँज उठा आकाश।

॥

माँ

प्रतिमा सँग घट सजे,

चला जागरण दौर।

॥

आलोकित

जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।

॥

गरबा

उत्सव की मची,

चारों ओर धमाल।

॥

आस्तिकता, विश्वास

में, भारत देश कमाल।

॥

शक्तिमान, अपराजिता,

माँ दुर्गा को पूज।

॥

अर्पित

कर भाव्यांजली,

जन-जन हुआ निहाल।

॥

आता

है जब क्वार का,

शुक्ल पक्ष हर बार। &

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗