कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५३ / ६५ № 53 of 65 रचना ५३ / ६५
२४ सितम्बर २०१४ 24 September 2014 २४ सितम्बर २०१४

मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक maan bढ़aao desh kaa kar naaree kaa maan /dohaa muktak मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक

मेला

है नवरात्रि का,

फैला परम प्रकाश।

देवी

की जयकार से,

गूँज उठा आकाश।

माँ

प्रतिमा सँग घट सजे,

चला जागरण दौर।

आलोकित

जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।

गरबा

उत्सव की मची,

चारों ओर धमाल।

आस्तिकता, विश्वास

में, भारत देश कमाल।

शक्तिमान, अपराजिता,

माँ दुर्गा को पूज।

अर्पित

कर भाव्यांजली,

जन-जन हुआ निहाल।

आता

है जब क्वार का,

शुक्ल पक्ष हर बार। &

melaa

hai nawaraatri kaa,

phailaa param prakaash

·

dewee

kee jayakaar se,

goonj uthaa aakaash

·

maan

pratimaa sang ghat saje,

chalaa jaagaran daur

·

aalokit

jeewan huaa, kataa tamas kaa paash

·

garabaa

utsaw kee machee,

chaaron or dhamaal

·

aastikataa, wishvaas

men, bhaarat desh kamaal

·

shaktimaan, aparaajitaa,

maan durgaa ko pooj

·

arpit

kar bhaavyaanjalee,

jan-jan huaa nihaal

·

aataa

hai jab kvaar kaa,

shukl paksh har baar &

मेला

है नवरात्रि का,

फैला परम प्रकाश।

देवी

की जयकार से,

गूँज उठा आकाश।

माँ

प्रतिमा सँग घट सजे,

चला जागरण दौर।

आलोकित

जीवन हुआ, कटा तमस का पाश।

गरबा

उत्सव की मची,

चारों ओर धमाल।

आस्तिकता, विश्वास

में, भारत देश कमाल।

शक्तिमान, अपराजिता,

माँ दुर्गा को पूज।

अर्पित

कर भाव्यांजली,

जन-जन हुआ निहाल।

आता

है जब क्वार का,

शुक्ल पक्ष हर बार। &

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗