कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८२ / १६३ № 82 of 163 रचना ८२ / १६३
२७ सितम्बर २०१४ 27 September 2014 २७ सितम्बर २०१४

फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे phale maatrii-sukh dvaare dvaare फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे

माँ मेरी, थकते तो होंगे

कर कोमल,

या पाँव तुम्हारे?

मगर कह नहीं पाते होंगे

नेह,

मोह, ममता

के मारे।

जगा सुबह को, प्रथम बाँचती

तुम घर की राहत का लेखा।

जुटती फिर क्रमबद्ध, खींचकर

अपनी हर चाहत पर रेखा।

maan meree, thakate to honge

·

kar komal,

yaa paanv tumhaare?

·

magar kah naheen paate honge

·

neh,

moh, mamataa

·

ke maare

·

jagaa subah ko, pratham baanchatee

·

tum ghar kee raahat kaa lekhaa

·

jutatee phir kramabaddh, kheenchakar

·

apanee har chaahat par rekhaa

माँ मेरी, थकते तो होंगे

कर कोमल,

या पाँव तुम्हारे?

मगर कह नहीं पाते होंगे

नेह,

मोह, ममता

के मारे।

जगा सुबह को, प्रथम बाँचती

तुम घर की राहत का लेखा।

जुटती फिर क्रमबद्ध, खींचकर

अपनी हर चाहत पर रेखा।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗