कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी
२७ सितम्बर २०१४ 27 September 2014 २७ सितम्बर २०१४
फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे phale maatrii-sukh dvaare dvaare फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे
माँ मेरी, थकते तो होंगे
॥
कर कोमल,
या पाँव तुम्हारे?
॥
मगर कह नहीं पाते होंगे
॥
नेह,
मोह, ममता
॥
के मारे।
॥
जगा सुबह को, प्रथम बाँचती
॥
तुम घर की राहत का लेखा।
॥
जुटती फिर क्रमबद्ध, खींचकर
॥
अपनी हर चाहत पर रेखा।
maan meree, thakate to honge
·
kar komal,
yaa paanv tumhaare?
·
magar kah naheen paate honge
·
neh,
moh, mamataa
·
ke maare
·
jagaa subah ko, pratham baanchatee
·
tum ghar kee raahat kaa lekhaa
·
jutatee phir kramabaddh, kheenchakar
·
apanee har chaahat par rekhaa
माँ मेरी, थकते तो होंगे
॥
कर कोमल,
या पाँव तुम्हारे?
॥
मगर कह नहीं पाते होंगे
॥
नेह,
मोह, ममता
॥
के मारे।
॥
जगा सुबह को, प्रथम बाँचती
॥
तुम घर की राहत का लेखा।
॥
जुटती फिर क्रमबद्ध, खींचकर
॥
अपनी हर चाहत पर रेखा।