ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ! zikr tyaag kaa huaa jahaan, maan! ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ!
ज़िक्र त्याग का हुआ
जहाँ माँ!
नाम तुम्हारा चलकर
आया।
कैसे तुम्हें रचा
विधना ने
इतना कोमल इतना
स्नेहिल!
ऊर्जस्वित इस मुख
के आगे
पूर्ण चंद्र भी
लगता धूमिल।
क्षण भंगुर भव-भोग
सकल माँ!
सुख अक्षुण्ण
तुम्हारा
जाया।
दिया जलाया
मंदिर-मंदिर
मान-मनौती की धर
बाती।
जहाँ देखती पीर-पाँव
तुम
zikr tyaag kaa huaa
jahaan maan!
naam tumhaaraa chalakar
aayaa
kaise tumhen rachaa
widhanaa ne
itanaa komal itanaa
snehil!
oorjasvit is mukh
ke aage
poorn chandr bhee
lagataa dhoomil
kshan bhangur bhaw-bhog
sakal maan!
sukh akshunn
tumhaaraa
jaayaa
diyaa jalaayaa
mandir-mandir
maan-manautee kee dhar
baatee
jahaan dekhatee peer-paanv
tum
ज़िक्र त्याग का हुआ
जहाँ माँ!
नाम तुम्हारा चलकर
आया।
कैसे तुम्हें रचा
विधना ने
इतना कोमल इतना
स्नेहिल!
ऊर्जस्वित इस मुख
के आगे
पूर्ण चंद्र भी
लगता धूमिल।
क्षण भंगुर भव-भोग
सकल माँ!
सुख अक्षुण्ण
तुम्हारा
जाया।
दिया जलाया
मंदिर-मंदिर
मान-मनौती की धर
बाती।
जहाँ देखती पीर-पाँव
तुम