कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८३ / १६३ № 83 of 163 रचना ८३ / १६३
१ अक्तूबर २०१४ 1 October 2014 १ अक्तूबर २०१४

ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ! zikr tyaag kaa huaa jahaan, maan! ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ!

ज़िक्र त्याग का हुआ

जहाँ माँ!

नाम तुम्हारा चलकर

आया।

कैसे तुम्हें रचा

विधना ने

इतना कोमल इतना

स्नेहिल!

ऊर्जस्वित इस मुख

के आगे

पूर्ण चंद्र भी

लगता धूमिल।

क्षण भंगुर भव-भोग

सकल माँ!

सुख अक्षुण्ण

तुम्हारा

जाया।

दिया जलाया

मंदिर-मंदिर

मान-मनौती की धर

बाती।

जहाँ देखती पीर-पाँव

तुम

zikr tyaag kaa huaa

jahaan maan!

·

naam tumhaaraa chalakar

·

aayaa

·

kaise tumhen rachaa

widhanaa ne

·

itanaa komal itanaa

snehil!

·

oorjasvit is mukh

ke aage

·

poorn chandr bhee

lagataa dhoomil

·

kshan bhangur bhaw-bhog

sakal maan!

·

sukh akshunn

tumhaaraa

·

jaayaa

·

diyaa jalaayaa

mandir-mandir

·

maan-manautee kee dhar

baatee

·

jahaan dekhatee peer-paanv

tum

ज़िक्र त्याग का हुआ

जहाँ माँ!

नाम तुम्हारा चलकर

आया।

कैसे तुम्हें रचा

विधना ने

इतना कोमल इतना

स्नेहिल!

ऊर्जस्वित इस मुख

के आगे

पूर्ण चंद्र भी

लगता धूमिल।

क्षण भंगुर भव-भोग

सकल माँ!

सुख अक्षुण्ण

तुम्हारा

जाया।

दिया जलाया

मंदिर-मंदिर

मान-मनौती की धर

बाती।

जहाँ देखती पीर-पाँव

तुम

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗