आइये होली खेलें aaiye holee khelen आइये होली खेलें
पुनः प्रेम के साथ पाहुना
फागुन लाया।
रंग कलश भर लाल
आइये होली खेलें।
कोयलिया की
कूक छा गई कुंज बनन में।
पायलिया हर
पाँव बंध गई हर आँगन में।
लदी बौर से
डाल, आम्र-तरु की बागन में।
मूक हुए वाचाल
आइये होली खेलें।
फूल-फूल ने
जल में आकर डुबकी मारी।
लाल लाल हुई
फुलबगिया की क्यारी-क्यारी।
लगे फूटने
गुब्बारे, तन गई पिचकारी।
झूमें जन बिन ताल
आइये होली खेलें।
क्या खुमार है
खूब!
punah prem ke saath paahunaa
phaagun laayaa
rang kalash bhar laal
aaiye holee khelen
koyaliyaa kee
kook chaa gaee kunj banan men
paayaliyaa har
paanv bandh gaee har aangan men
ladee baur se
daal, aamr-taru kee baagan men
mook hue waachaal
aaiye holee khelen
phool-phool ne
jal men aakar dubakee maaree
laal laal huee
phulabagiyaa kee kyaaree-kyaaree
lage phootane
gubbaare, tan gaee pichakaaree
jhoomen jan bin taal
aaiye holee khelen
kyaa khumaar hai
khoob!
पुनः प्रेम के साथ पाहुना
फागुन लाया।
रंग कलश भर लाल
आइये होली खेलें।
कोयलिया की
कूक छा गई कुंज बनन में।
पायलिया हर
पाँव बंध गई हर आँगन में।
लदी बौर से
डाल, आम्र-तरु की बागन में।
मूक हुए वाचाल
आइये होली खेलें।
फूल-फूल ने
जल में आकर डुबकी मारी।
लाल लाल हुई
फुलबगिया की क्यारी-क्यारी।
लगे फूटने
गुब्बारे, तन गई पिचकारी।
झूमें जन बिन ताल
आइये होली खेलें।
क्या खुमार है
खूब!