कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६२ / १६४ № 62 of 164 रचना ६२ / १६४
१३ मार्च २०१४ 13 March 2014 १३ मार्च २०१४

आइये होली खेलें aaiye holee khelen आइये होली खेलें

पुनः प्रेम के साथ पाहुना

॥

फागुन लाया।

रंग कलश भर लाल

आइये होली खेलें।

॥

कोयलिया की

कूक छा गई कुंज बनन में।

पायलिया हर

पाँव बंध गई हर आँगन में।

लदी बौर से

डाल, आम्र-तरु की बागन में।

मूक हुए वाचाल

आइये होली खेलें।

॥

फूल-फूल ने

जल में आकर डुबकी मारी।

लाल लाल हुई

फुलबगिया की क्यारी-क्यारी।

लगे फूटने

गुब्बारे, तन गई पिचकारी।

झूमें जन बिन ताल

आइये होली खेलें।

॥

क्या खुमार है

खूब!

punah prem ke saath paahunaa

·

phaagun laayaa

rang kalash bhar laal

aaiye holee khelen

·

koyaliyaa kee

kook chaa gaee kunj banan men

paayaliyaa har

paanv bandh gaee har aangan men

ladee baur se

daal, aamr-taru kee baagan men

mook hue waachaal

aaiye holee khelen

·

phool-phool ne

jal men aakar dubakee maaree

laal laal huee

phulabagiyaa kee kyaaree-kyaaree

lage phootane

gubbaare, tan gaee pichakaaree

jhoomen jan bin taal

aaiye holee khelen

·

kyaa khumaar hai

khoob!

पुनः प्रेम के साथ पाहुना

॥

फागुन लाया।

रंग कलश भर लाल

आइये होली खेलें।

॥

कोयलिया की

कूक छा गई कुंज बनन में।

पायलिया हर

पाँव बंध गई हर आँगन में।

लदी बौर से

डाल, आम्र-तरु की बागन में।

मूक हुए वाचाल

आइये होली खेलें।

॥

फूल-फूल ने

जल में आकर डुबकी मारी।

लाल लाल हुई

फुलबगिया की क्यारी-क्यारी।

लगे फूटने

गुब्बारे, तन गई पिचकारी।

झूमें जन बिन ताल

आइये होली खेलें।

॥

क्या खुमार है

खूब!

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗