कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६३ / १६३ № 63 of 163 रचना ६३ / १६३
१४ मार्च २०१४ 14 March 2014 १४ मार्च २०१४

रंग में भीगी हवा rang men bheegee hawaa रंग में भीगी हवा

रंग में भीगी हवा

चंचल चतुर इक नार सी

गाने लगी सखि, होरियाँ।

ऋतु बसंती,

पाश फैला कर खड़ी

फागुन प्रिया।

सकल जल-थल, नभचरों को खूब

सम्मोहित किया।

भंग में डूबी फिजा ने, खोल दीं मनुहार की

भावों भरी बहु बोरियाँ।

मद भरे सागर में सारा जग

लगा है डूबने।

भू पे उतरा गगन, हर ज़र्रा

लगा है झूमने।

बाँचने बैठे छबीले, गीत छंदों की चुटीली

प्रेम रस की पोथियाँ।

दिख रहे कोयल, पपीहे,

rang men bheegee hawaa

·

chanchal chatur ik naar see

·

gaane lagee sakhi, horiyaan

·

riitu basantee,

paash phailaa kar khadee

·

phaagun priyaa

·

sakal jal-thal, nabhacharon ko khoob

·

sammohit kiyaa

·

bhang men doobee phijaa ne, khol deen manuhaar kee

·

bhaawon bharee bahu boriyaan

·

mad bhare saagar men saaraa jag

·

lagaa hai doobane

·

bhoo pe utaraa gagan, har zarraa

·

lagaa hai jhoomane

·

baanchane baithe chabeele, geet chandon kee chuteelee

·

prem ras kee pothiyaan

·

dikh rahe koyal, papeehe,

रंग में भीगी हवा

चंचल चतुर इक नार सी

गाने लगी सखि, होरियाँ।

ऋतु बसंती,

पाश फैला कर खड़ी

फागुन प्रिया।

सकल जल-थल, नभचरों को खूब

सम्मोहित किया।

भंग में डूबी फिजा ने, खोल दीं मनुहार की

भावों भरी बहु बोरियाँ।

मद भरे सागर में सारा जग

लगा है डूबने।

भू पे उतरा गगन, हर ज़र्रा

लगा है झूमने।

बाँचने बैठे छबीले, गीत छंदों की चुटीली

प्रेम रस की पोथियाँ।

दिख रहे कोयल, पपीहे,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗