रंग में भीगी हवा rang men bheegee hawaa रंग में भीगी हवा
रंग में भीगी हवा
चंचल चतुर इक नार सी
गाने लगी सखि, होरियाँ।
ऋतु बसंती,
पाश फैला कर खड़ी
फागुन प्रिया।
सकल जल-थल, नभचरों को खूब
सम्मोहित किया।
भंग में डूबी फिजा ने, खोल दीं मनुहार की
भावों भरी बहु बोरियाँ।
मद भरे सागर में सारा जग
लगा है डूबने।
भू पे उतरा गगन, हर ज़र्रा
लगा है झूमने।
बाँचने बैठे छबीले, गीत छंदों की चुटीली
प्रेम रस की पोथियाँ।
दिख रहे कोयल, पपीहे,
rang men bheegee hawaa
chanchal chatur ik naar see
gaane lagee sakhi, horiyaan
riitu basantee,
paash phailaa kar khadee
phaagun priyaa
sakal jal-thal, nabhacharon ko khoob
sammohit kiyaa
bhang men doobee phijaa ne, khol deen manuhaar kee
bhaawon bharee bahu boriyaan
mad bhare saagar men saaraa jag
lagaa hai doobane
bhoo pe utaraa gagan, har zarraa
lagaa hai jhoomane
baanchane baithe chabeele, geet chandon kee chuteelee
prem ras kee pothiyaan
dikh rahe koyal, papeehe,
रंग में भीगी हवा
चंचल चतुर इक नार सी
गाने लगी सखि, होरियाँ।
ऋतु बसंती,
पाश फैला कर खड़ी
फागुन प्रिया।
सकल जल-थल, नभचरों को खूब
सम्मोहित किया।
भंग में डूबी फिजा ने, खोल दीं मनुहार की
भावों भरी बहु बोरियाँ।
मद भरे सागर में सारा जग
लगा है डूबने।
भू पे उतरा गगन, हर ज़र्रा
लगा है झूमने।
बाँचने बैठे छबीले, गीत छंदों की चुटीली
प्रेम रस की पोथियाँ।
दिख रहे कोयल, पपीहे,