कहमुकरियाँ/1 से 10 kahamukariyaan/1 se 10 कहमुकरियाँ/1 से 10
1)
रखती उसको अंग लगाकर।
चलती उसके संग लजाकर।
लगे सहज उसका अपनापन।
क्या सखि, सजना?
ना सखि, दामन!
2)
दिन में तो वो खूब तपाए।
रात कभी भी पास न आए।
फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।
क्या सखि साजन?
ना सखि, दिनकर!
3)
वो अपनी मनमानी करता।
कुछ माँगूँ तो कान न धरता।
कठपुतली सा नाच नचाता।
क्या सखि साजन?
नहीं, विधाता!
४)
भरी
भीड़ में पास बुलाया।
गोद
1)
rakhatee usako ang lagaakar
chalatee usake sang lajaakar
lage sahaj usakaa apanaapan
kyaa sakhi, sajanaa?
naa sakhi, daaman!
2)
din men to wo khoob tapaae
raat kabhee bhee paas n aae
phir bhee khush hotee hoon milakar
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, dinakar!
3)
wo apanee manamaanee karataa
kuch maangoon to kaan n dharataa
kathaputalee saa naach nachaataa
kyaa sakhi saajan?
naheen, widhaataa!
4)
bharee
bheed men paas bulaayaa
god
1)
रखती उसको अंग लगाकर।
चलती उसके संग लजाकर।
लगे सहज उसका अपनापन।
क्या सखि, सजना?
ना सखि, दामन!
2)
दिन में तो वो खूब तपाए।
रात कभी भी पास न आए।
फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।
क्या सखि साजन?
ना सखि, दिनकर!
3)
वो अपनी मनमानी करता।
कुछ माँगूँ तो कान न धरता।
कठपुतली सा नाच नचाता।
क्या सखि साजन?
नहीं, विधाता!
४)
भरी
भीड़ में पास बुलाया।
गोद