कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३६ / ६७ № 36 of 67 रचना ३६ / ६७
१८ मार्च २०१४ 18 March 2014 १८ मार्च २०१४
इस श्रृंखला में in this series इन श्रृंखलाअ में भाग ०१ / ०५ part 01 of 05 भाग ०१ / ०५

कहमुकरियाँ/1 से 10 kahamukariyaan/1 se 10 कहमुकरियाँ/1 से 10

1)

॥

रखती उसको अंग लगाकर।

॥

चलती उसके संग लजाकर।

॥

लगे सहज उसका अपनापन।

॥

क्या सखि, सजना?

॥

ना सखि, दामन!

॥

2)

॥

दिन में तो वो खूब तपाए।

॥

रात कभी भी पास न आए।

॥

फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।

॥

क्या सखि साजन?

॥

ना सखि, दिनकर!

॥

3)

॥

वो अपनी मनमानी करता।

॥

कुछ माँगूँ तो कान न धरता।

॥

कठपुतली सा नाच नचाता।

॥

क्या सखि साजन?

॥

नहीं, विधाता!

॥

४)

॥

भरी

भीड़ में पास बुलाया।

॥

गोद

1)

·

rakhatee usako ang lagaakar

·

chalatee usake sang lajaakar

·

lage sahaj usakaa apanaapan

·

kyaa sakhi, sajanaa?

·

naa sakhi, daaman!

·

2)

·

din men to wo khoob tapaae

·

raat kabhee bhee paas n aae

·

phir bhee khush hotee hoon milakar

·

kyaa sakhi saajan?

·

naa sakhi, dinakar!

·

3)

·

wo apanee manamaanee karataa

·

kuch maangoon to kaan n dharataa

·

kathaputalee saa naach nachaataa

·

kyaa sakhi saajan?

·

naheen, widhaataa!

·

4)

·

bharee

bheed men paas bulaayaa

·

god

1)

॥

रखती उसको अंग लगाकर।

॥

चलती उसके संग लजाकर।

॥

लगे सहज उसका अपनापन।

॥

क्या सखि, सजना?

॥

ना सखि, दामन!

॥

2)

॥

दिन में तो वो खूब तपाए।

॥

रात कभी भी पास न आए।

॥

फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।

॥

क्या सखि साजन?

॥

ना सखि, दिनकर!

॥

3)

॥

वो अपनी मनमानी करता।

॥

कुछ माँगूँ तो कान न धरता।

॥

कठपुतली सा नाच नचाता।

॥

क्या सखि साजन?

॥

नहीं, विधाता!

॥

४)

॥

भरी

भीड़ में पास बुलाया।

॥

गोद

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗