कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३५ / ६५ № 35 of 65 रचना ३५ / ६५
१८ मार्च २०१४ 18 March 2014 १८ मार्च २०१४

कहमुकरियाँ/1 से 10 kahamukariyaan/1 se 10 कहमुकरियाँ/1 से 10

1)

रखती उसको अंग लगाकर।

चलती उसके संग लजाकर।

लगे सहज उसका अपनापन।

क्या सखि, सजना?

ना सखि, दामन!

2)

दिन में तो वो खूब तपाए।

रात कभी भी पास न आए।

फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।

क्या सखि साजन?

ना सखि, दिनकर!

3)

वो अपनी मनमानी करता।

कुछ माँगूँ तो कान न धरता।

कठपुतली सा नाच नचाता।

क्या सखि साजन?

नहीं, विधाता!

४)

भरी

भीड़ में पास बुलाया।

गोद

1)

·

rakhatee usako ang lagaakar

·

chalatee usake sang lajaakar

·

lage sahaj usakaa apanaapan

·

kyaa sakhi, sajanaa?

·

naa sakhi, daaman!

·

2)

·

din men to wo khoob tapaae

·

raat kabhee bhee paas n aae

·

phir bhee khush hotee hoon milakar

·

kyaa sakhi saajan?

·

naa sakhi, dinakar!

·

3)

·

wo apanee manamaanee karataa

·

kuch maangoon to kaan n dharataa

·

kathaputalee saa naach nachaataa

·

kyaa sakhi saajan?

·

naheen, widhaataa!

·

4)

·

bharee

bheed men paas bulaayaa

·

god

1)

रखती उसको अंग लगाकर।

चलती उसके संग लजाकर।

लगे सहज उसका अपनापन।

क्या सखि, सजना?

ना सखि, दामन!

2)

दिन में तो वो खूब तपाए।

रात कभी भी पास न आए।

फिर भी खुश होती हूँ मिलकर।

क्या सखि साजन?

ना सखि, दिनकर!

3)

वो अपनी मनमानी करता।

कुछ माँगूँ तो कान न धरता।

कठपुतली सा नाच नचाता।

क्या सखि साजन?

नहीं, विधाता!

४)

भरी

भीड़ में पास बुलाया।

गोद

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗