कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३४ / ६७ № 34 of 67 रचना ३४ / ६७
१८ मार्च २०१४ 18 March 2014 १८ मार्च २०१४
इस श्रृंखला में in this series इन श्रृंखलाअ में भाग ०२ / ०५ part 02 of 05 भाग ०२ / ०५

कह मुकरियाँ /11से 20 kah mukariyaan /11se 20 कह मुकरियाँ /11से 20

11)

थक

जाऊँ तो पास बुलाए।

नर्म

छुअन से तन सहलाए।

मिले

सुखद, अहसास सलोना।

क्या

सखि साजन?

नहीं, बिछौना!

12)

रातों

की वो नींद उड़ाए।

अपनी

धुन में गीत सुनाए।

बात

न माने, बैरी बर्बर।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, मच्छर!

13)

उसका

नाम सदा मैं टेरूँ।

नित्य

उसी की माला फेरूँ।

रूठ

न जाए, मुझसे दैया!

क्या

सखि साजन?

नहीं, रुपैया!

14)

सो

जाती जब पलकें मींचे।

चुपके

11)

·

thak

jaaoon to paas bulaae

·

narm

chuan se tan sahalaae

·

mile

sukhad, ahasaas salonaa

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naheen, bichaunaa!

·

12)

·

raaton

kee wo neend udaae

·

apanee

dhun men geet sunaae

·

baat

n maane, bairee barbar

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa

sakhi, machchar!

·

13)

·

usakaa

naam sadaa main teroon

·

nity

usee kee maalaa pheroon

·

rooth

n jaae, mujhase daiyaa!

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naheen, rupaiyaa!

·

14)

·

so

jaatee jab palaken meenche

·

chupake

11)

थक

जाऊँ तो पास बुलाए।

नर्म

छुअन से तन सहलाए।

मिले

सुखद, अहसास सलोना।

क्या

सखि साजन?

नहीं, बिछौना!

12)

रातों

की वो नींद उड़ाए।

अपनी

धुन में गीत सुनाए।

बात

न माने, बैरी बर्बर।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, मच्छर!

13)

उसका

नाम सदा मैं टेरूँ।

नित्य

उसी की माला फेरूँ।

रूठ

न जाए, मुझसे दैया!

क्या

सखि साजन?

नहीं, रुपैया!

14)

सो

जाती जब पलकें मींचे।

चुपके

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗