ईश तुम्हारे द्वार पर eesh tumhaare dvaar par ईश तुम्हारे द्वार पर
ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा
अन्याय।
कोई पाए दो गुना, कोई वापस
जाय।
समदरसी कहकर गए, तुमको संत
फ़क़ीर।
पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग
तक़दीर।
हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके
करतार।
दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।
जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।
धरती पर दिखता नहीं, कोई
न्यायाधीश।
नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए
अनाथ।
eesh tumhaare dvaar par, ye kaisaa
anyaay
koee paae do gunaa, koee waapas
jaay
samadarasee kahakar gae, tumako sant
faqeer
par hai sabakee kyon bhalaa, alag-alag
taqadeer
ham to praanee tuchch hain, tum sabake
karataar
daataa, phir yah kisalie, bhed bhaaw kaa waar
jaaen kisakee ham sharan, batalaao he eesh
dharatee par dikhataa naheen, koee
nyaayaadheesh
naath tumhaare raajy men, ham kyon hue
anaath
ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा
अन्याय।
कोई पाए दो गुना, कोई वापस
जाय।
समदरसी कहकर गए, तुमको संत
फ़क़ीर।
पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग
तक़दीर।
हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके
करतार।
दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।
जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।
धरती पर दिखता नहीं, कोई
न्यायाधीश।
नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए
अनाथ।