कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १८ / ६५ № 18 of 65 रचना १८ / ६५
२० दिसम्बर २०१२ 20 December 2012 २० दिसम्बर २०१२

ईश तुम्हारे द्वार पर eesh tumhaare dvaar par ईश तुम्हारे द्वार पर

ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा

अन्याय।

कोई पाए दो गुना, कोई वापस

जाय।

समदरसी कहकर गए, तुमको संत

फ़क़ीर।

पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग

तक़दीर।

हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके

करतार।

दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।

जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।

धरती पर दिखता नहीं, कोई

न्यायाधीश।

नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए

अनाथ।

eesh tumhaare dvaar par, ye kaisaa

anyaay

·

koee paae do gunaa, koee waapas

jaay

·

samadarasee kahakar gae, tumako sant

faqeer

·

par hai sabakee kyon bhalaa, alag-alag

taqadeer

·

ham to praanee tuchch hain, tum sabake

karataar

·

daataa, phir yah kisalie, bhed bhaaw kaa waar

·

jaaen kisakee ham sharan, batalaao he eesh

·

dharatee par dikhataa naheen, koee

nyaayaadheesh

·

naath tumhaare raajy men, ham kyon hue

anaath

ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा

अन्याय।

कोई पाए दो गुना, कोई वापस

जाय।

समदरसी कहकर गए, तुमको संत

फ़क़ीर।

पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग

तक़दीर।

हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके

करतार।

दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।

जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।

धरती पर दिखता नहीं, कोई

न्यायाधीश।

नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए

अनाथ।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗