कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १९ / ६७ № 19 of 67 रचना १९ / ६७
२० दिसम्बर २०१२ 20 December 2012 २० दिसम्बर २०१२

ईश तुम्हारे द्वार पर eesh tumhaare dvaar par ईश तुम्हारे द्वार पर

ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा

अन्याय।

॥

कोई पाए दो गुना, कोई वापस

जाय।

॥

समदरसी कहकर गए, तुमको संत

फ़क़ीर।

॥

पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग

तक़दीर।

॥

हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके

करतार।

॥

दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।

॥

जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।

॥

धरती पर दिखता नहीं, कोई

न्यायाधीश।

॥

नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए

अनाथ।

eesh tumhaare dvaar par, ye kaisaa

anyaay

·

koee paae do gunaa, koee waapas

jaay

·

samadarasee kahakar gae, tumako sant

faqeer

·

par hai sabakee kyon bhalaa, alag-alag

taqadeer

·

ham to praanee tuchch hain, tum sabake

karataar

·

daataa, phir yah kisalie, bhed bhaaw kaa waar

·

jaaen kisakee ham sharan, batalaao he eesh

·

dharatee par dikhataa naheen, koee

nyaayaadheesh

·

naath tumhaare raajy men, ham kyon hue

anaath

ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा

अन्याय।

॥

कोई पाए दो गुना, कोई वापस

जाय।

॥

समदरसी कहकर गए, तुमको संत

फ़क़ीर।

॥

पर है सबकी क्यों भला, अलग-अलग

तक़दीर।

॥

हम तो प्राणी तुच्छ हैं, तुम सबके

करतार।

॥

दाता, फिर यह किसलिए, भेद भाव का वार।

॥

जाएँ किसकी हम शरण, बतलाओ हे ईश।

॥

धरती पर दिखता नहीं, कोई

न्यायाधीश।

॥

नाथ तुम्हारे राज्य में, हम क्यों हुए

अनाथ।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗