कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १७ / ६५ № 17 of 65 रचना १७ / ६५
१८ दिसम्बर २०१२ 18 December 2012 १८ दिसम्बर २०१२

सच कहता है आइना sach kahataa hai aainaa सच कहता है आइना

सच कहता है आइना, देखें जितनी बार।

सौ टुकड़े कर दीजिये, वही सत्य सौ बार।

जैसा होगा आइना, वैसा दिखता रूप।

समतल अगर हुआ नहीं, दिखे रूप विद्रूप।

सूरत देखे आइना, सीरत जान न पाय।

झूठ रहेगा सामने, सत्य छिपा रह

जाय।

दर्पण का क्या दोष है, करते उसपर घात।

मन से अपने पूछिए, बड़े शर्म की बात।

दर्पण तो दिखला रहा, तेरा उजला रूप।

अंतर का कैसे दिखे,

sach kahataa hai aainaa, dekhen jitanee baar

·

sau tukade kar deejiye, wahee saty sau baar

·

jaisaa hogaa aainaa, waisaa dikhataa roop

·

samatal agar huaa naheen, dikhe roop widroop

·

soorat dekhe aainaa, seerat jaan n paay

·

jhooth rahegaa saamane, saty chipaa rah

jaay

·

darpan kaa kyaa dosh hai, karate usapar ghaat

·

man se apane poochie, bade sharm kee baat

·

darpan to dikhalaa rahaa, teraa ujalaa roop

·

antar kaa kaise dikhe,

सच कहता है आइना, देखें जितनी बार।

सौ टुकड़े कर दीजिये, वही सत्य सौ बार।

जैसा होगा आइना, वैसा दिखता रूप।

समतल अगर हुआ नहीं, दिखे रूप विद्रूप।

सूरत देखे आइना, सीरत जान न पाय।

झूठ रहेगा सामने, सत्य छिपा रह

जाय।

दर्पण का क्या दोष है, करते उसपर घात।

मन से अपने पूछिए, बड़े शर्म की बात।

दर्पण तो दिखला रहा, तेरा उजला रूप।

अंतर का कैसे दिखे,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗