कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६४ / १६३ № 64 of 163 रचना ६४ / १६३
२२ मार्च २०१४ 22 March 2014 २२ मार्च २०१४

कैसे बीते काले दिन kaise beete kaale din कैसे बीते काले दिन

ज़रा पूछिए इन लोगों से,

कैसे बीते काले दिन।

फुटपाथों की सर्द सेज पर,

क्रूर कुहासे वाले दिन।

सूरज,

जो इनका हमजोली,

वो भी करता रहा ठिठोली।

तहखाने में भेज रश्मियाँ,

ले आता कुहरा भर, झोली।

गर्म वस्त्र तो मौज मनाते,

इन्हें सौंपते छाले दिन।

दूर जली जब आग देखते,

नज़रों से ही ताप सेंकते

बैरन रात न काटे कटती,

गात हवा के तीर छेदते।

इन

zaraa poochie in logon se,

·

kaise beete kaale din

·

phutapaathon kee sard sej par,

·

kroor kuhaase waale din

·

sooraj,

jo inakaa hamajolee,

·

wo bhee karataa rahaa thitholee

·

tahakhaane men bhej rashmiyaan,

·

le aataa kuharaa bhar, jholee

·

garm wastr to mauj manaate,

·

inhen saunpate chaale din

·

door jalee jab aag dekhate,

·

nazaron se hee taap senkate

·

bairan raat n kaate katatee,

·

gaat hawaa ke teer chedate

·

in

ज़रा पूछिए इन लोगों से,

कैसे बीते काले दिन।

फुटपाथों की सर्द सेज पर,

क्रूर कुहासे वाले दिन।

सूरज,

जो इनका हमजोली,

वो भी करता रहा ठिठोली।

तहखाने में भेज रश्मियाँ,

ले आता कुहरा भर, झोली।

गर्म वस्त्र तो मौज मनाते,

इन्हें सौंपते छाले दिन।

दूर जली जब आग देखते,

नज़रों से ही ताप सेंकते

बैरन रात न काटे कटती,

गात हवा के तीर छेदते।

इन

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗