गुलमोहर की छाँव गाँव में gulamohar kee chaanv gaanv men गुलमोहर की छाँव गाँव में
गुलमोहर की छाँव, गाँव में
काट रही है दिन एकाकी।
ढूँढ रही है उन अपनों को
शहर गए जो उसे भुलाकर।
उजियारों को पीठ दिखाई
अँधियारों में साँस बसाकर।
जड़ पिंजड़ों से प्रीत जोड़ ली
खोकर रसमय जीवन-झाँकी।
फल वृक्षों को छोड़ उन्होंने
गमलों में बोन्साई सींचे।
अमराई आँगन कर सूने
इमारतों में पर्दे खींचे।
भाग दौड़ आपाधापी में
बिसरा दीं बातें
gulamohar kee chaanv, gaanv men
kaat rahee hai din ekaakee
dhoondh rahee hai un apanon ko
shahar gae jo use bhulaakar
ujiyaaron ko peeth dikhaaee
andhiyaaron men saans basaakar
jad pinjadon se preet jod lee
khokar rasamay jeewan-jhaankee
phal wriikshon ko chod unhonne
gamalon men bonsaaee seenche
amaraaee aangan kar soone
imaaraton men parde kheenche
bhaag daud aapaadhaapee men
bisaraa deen baaten
गुलमोहर की छाँव, गाँव में
काट रही है दिन एकाकी।
ढूँढ रही है उन अपनों को
शहर गए जो उसे भुलाकर।
उजियारों को पीठ दिखाई
अँधियारों में साँस बसाकर।
जड़ पिंजड़ों से प्रीत जोड़ ली
खोकर रसमय जीवन-झाँकी।
फल वृक्षों को छोड़ उन्होंने
गमलों में बोन्साई सींचे।
अमराई आँगन कर सूने
इमारतों में पर्दे खींचे।
भाग दौड़ आपाधापी में
बिसरा दीं बातें