कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६५ / १६४ № 65 of 164 रचना ६५ / १६४
२६ मार्च २०१४ 26 March 2014 २६ मार्च २०१४

गुलमोहर की छाँव गाँव में gulamohar kee chaanv gaanv men गुलमोहर की छाँव गाँव में

गुलमोहर की छाँव, गाँव में

॥

काट रही है दिन एकाकी।

॥

ढूँढ रही है उन अपनों को

॥

शहर गए जो उसे भुलाकर।

॥

उजियारों को पीठ दिखाई

॥

अँधियारों में साँस बसाकर।

॥

जड़ पिंजड़ों से प्रीत जोड़ ली

॥

खोकर रसमय जीवन-झाँकी।

॥

फल वृक्षों को छोड़ उन्होंने

॥

गमलों में बोन्साई सींचे।

॥

अमराई आँगन कर सूने

॥

इमारतों में पर्दे खींचे।

॥

भाग दौड़ आपाधापी में

॥

बिसरा दीं बातें

gulamohar kee chaanv, gaanv men

·

kaat rahee hai din ekaakee

·

dhoondh rahee hai un apanon ko

·

shahar gae jo use bhulaakar

·

ujiyaaron ko peeth dikhaaee

·

andhiyaaron men saans basaakar

·

jad pinjadon se preet jod lee

·

khokar rasamay jeewan-jhaankee

·

phal wriikshon ko chod unhonne

·

gamalon men bonsaaee seenche

·

amaraaee aangan kar soone

·

imaaraton men parde kheenche

·

bhaag daud aapaadhaapee men

·

bisaraa deen baaten

गुलमोहर की छाँव, गाँव में

॥

काट रही है दिन एकाकी।

॥

ढूँढ रही है उन अपनों को

॥

शहर गए जो उसे भुलाकर।

॥

उजियारों को पीठ दिखाई

॥

अँधियारों में साँस बसाकर।

॥

जड़ पिंजड़ों से प्रीत जोड़ ली

॥

खोकर रसमय जीवन-झाँकी।

॥

फल वृक्षों को छोड़ उन्होंने

॥

गमलों में बोन्साई सींचे।

॥

अमराई आँगन कर सूने

॥

इमारतों में पर्दे खींचे।

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भाग दौड़ आपाधापी में

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बिसरा दीं बातें

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗