कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २० / १६४ № 20 of 164 रचना २० / १६४
३ जुलाई २०१३ 3 July 2013 ३ जुलाई २०१३

हज़ार गीत सावनी hazaar geet saawanee हज़ार गीत सावनी

हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने

॥

झुलाएँ झूल,

झूमके, लुभावनी बहार में।

॥

विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की

॥

जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।

॥

मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में

॥

अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।

॥

चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही

॥

वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।

॥

खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में

॥

कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार

hazaar geet saawanee, rache sakhee phuhaar ne

·

jhulaaen jhool,

jhoomake, lubhaawanee bahaar men

·

wishaal wyom ne rachee, sudarsh raas rang kee

·

jiyaa prasann ho uthaa, phuhaar men umang kee

·

mayoor mast nriity men, kilolate kataar men

·

amogh megh geetikaa, sunaa rahe malhaar men

·

chढ़ee lataa chataan pe, bagaan ko chiढ़aa rahee

·

wasundharaa, hareetimaa, bikher muskuraa rahee

·

khile gulaab jhund men, jhukee dagaal bhaar men

·

kalee-kalee huee wibhor, mausamee bayaar

हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने

॥

झुलाएँ झूल,

झूमके, लुभावनी बहार में।

॥

विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की

॥

जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।

॥

मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में

॥

अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।

॥

चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही

॥

वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।

॥

खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में

॥

कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗