हज़ार गीत सावनी hazaar geet saawanee हज़ार गीत सावनी
हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने
झुलाएँ झूल,
झूमके, लुभावनी बहार में।
विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की
जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।
मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में
अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।
चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही
वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।
खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में
कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार
hazaar geet saawanee, rache sakhee phuhaar ne
jhulaaen jhool,
jhoomake, lubhaawanee bahaar men
wishaal wyom ne rachee, sudarsh raas rang kee
jiyaa prasann ho uthaa, phuhaar men umang kee
mayoor mast nriity men, kilolate kataar men
amogh megh geetikaa, sunaa rahe malhaar men
chढ़ee lataa chataan pe, bagaan ko chiढ़aa rahee
wasundharaa, hareetimaa, bikher muskuraa rahee
khile gulaab jhund men, jhukee dagaal bhaar men
kalee-kalee huee wibhor, mausamee bayaar
हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने
झुलाएँ झूल,
झूमके, लुभावनी बहार में।
विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की
जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।
मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में
अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।
चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही
वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।
खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में
कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार