कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २० / १६३ № 20 of 163 रचना २० / १६३
३ जुलाई २०१३ 3 July 2013 ३ जुलाई २०१३

हज़ार गीत सावनी hazaar geet saawanee हज़ार गीत सावनी

हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने

झुलाएँ झूल,

झूमके, लुभावनी बहार में।

विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की

जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।

मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में

अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।

चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही

वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।

खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में

कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार

hazaar geet saawanee, rache sakhee phuhaar ne

·

jhulaaen jhool,

jhoomake, lubhaawanee bahaar men

·

wishaal wyom ne rachee, sudarsh raas rang kee

·

jiyaa prasann ho uthaa, phuhaar men umang kee

·

mayoor mast nriity men, kilolate kataar men

·

amogh megh geetikaa, sunaa rahe malhaar men

·

chढ़ee lataa chataan pe, bagaan ko chiढ़aa rahee

·

wasundharaa, hareetimaa, bikher muskuraa rahee

·

khile gulaab jhund men, jhukee dagaal bhaar men

·

kalee-kalee huee wibhor, mausamee bayaar

हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने

झुलाएँ झूल,

झूमके, लुभावनी बहार में।

विशाल व्योम ने रची, सुदर्श रास रंग की

जिया प्रसन्न हो उठा, फुहार में उमंग की।

मयूर मस्त नृत्य में, किलोलते कतार में

अमोघ मेघ गीतिका, सुना रहे मल्हार में।

चढ़ी लता छतान पे, बगान को चिढ़ा रही

वसुंधरा, हरीतिमा, बिखेर मुस्कुरा रही।

खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में

कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗