कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३ / २०५ № 3 of 205 रचना ३ / २०५
२ जुलाई २०१३ 2 July 2013 २ जुलाई २०१३

बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है! barasaat kaa ye mausam,kitanaa haseen hai! बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है!

बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है!

॥

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है!

॥

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार

॥

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

॥

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ

॥

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

॥

विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी

॥

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है!

॥

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ

॥

रस-रूप का समागम, कितना हसीन है!

॥

मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना

॥

नगमें सुनाता आलम, कितना हसीन है!

॥

हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून

॥

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

barasaat kaa ye mausam, kitanaa haseen hai!

·

dharatee gagan kaa sangam, kitanaa haseen hai!

·

jaatee nazar jahaan tak, bauchaar kee bahaar

·

boondon kaa nriity cham-cham, kitanaa haseen hai!

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bachchon ke haath men hain, kaagaz kee kishtiyaan

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phir bheegane kaa ye kram, kitanaa haseen hai!

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wihagon kee raaginee hai, koyal kee kook bhee

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upawan kaa roop anupam, kitanaa haseen hai!

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jhoolon pe peeng bharateen, ithalaateen taruniyaan

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ras-roop kaa samaagam, kitanaa haseen hai!

·

mitron kaa saath ho to, aanand do gunaa

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nagamen sunaataa aalam, kitanaa haseen hai!

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har man kaa mail mete, sukhadaaee maanasoon

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har man kaa nek hamadam, kitanaa haseen hai!

·

-kalpanaa raamaanee

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protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है!

॥

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है!

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जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार

॥

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

॥

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ

॥

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

॥

विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी

॥

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है!

॥

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ

॥

रस-रूप का समागम, कितना हसीन है!

॥

मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना

॥

नगमें सुनाता आलम, कितना हसीन है!

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हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून

॥

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!

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-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗