कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २ / २०४ № 2 of 204 रचना २ / २०४
२ जुलाई २०१३ 2 July 2013 २ जुलाई २०१३

बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है! barasaat kaa ye mausam,kitanaa haseen hai! बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है!

बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है!

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है!

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है!

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ

रस-रूप का समागम, कितना हसीन है!

मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना

नगमें सुनाता आलम, कितना हसीन है!

हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

barasaat kaa ye mausam, kitanaa haseen hai!

·

dharatee gagan kaa sangam, kitanaa haseen hai!

·

jaatee nazar jahaan tak, bauchaar kee bahaar

·

boondon kaa nriity cham-cham, kitanaa haseen hai!

·

bachchon ke haath men hain, kaagaz kee kishtiyaan

·

phir bheegane kaa ye kram, kitanaa haseen hai!

·

wihagon kee raaginee hai, koyal kee kook bhee

·

upawan kaa roop anupam, kitanaa haseen hai!

·

jhoolon pe peeng bharateen, ithalaateen taruniyaan

·

ras-roop kaa samaagam, kitanaa haseen hai!

·

mitron kaa saath ho to, aanand do gunaa

·

nagamen sunaataa aalam, kitanaa haseen hai!

·

har man kaa mail mete, sukhadaaee maanasoon

·

har man kaa nek hamadam, kitanaa haseen hai!

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है!

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है!

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है!

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ

रस-रूप का समागम, कितना हसीन है!

मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना

नगमें सुनाता आलम, कितना हसीन है!

हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗