कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २२ / ६५ № 22 of 65 रचना २२ / ६५
१५ जून २०१३ 15 June 2013 १५ जून २०१३

चली मुग्ध भागीरथी chalee mugdh bhaageerathee चली मुग्ध भागीरथी

उच्च हिमालय पार कर, मैदानों की ओर।

चली मुग्ध भागीरथी, होकर भाव विभोर।

गो मुख से निकली चली, वेगमई अविराम।

धरती पर हरिद्वार में, मिला उसे विश्राम।

गंगा से ही विश्व में, भारत की पहचान।

लाखों जन जुटते यहाँ, करते पावन स्नान।

सलिला पाप विनाशिनी, करती रोग निदान।

दुख हरणी,सुख दायिनी, देती जीवन दान।

आए जो इस बार हम, गंगा माँ के

uchch himaalay paar kar, maidaanon kee or

·

chalee mugdh bhaageerathee, hokar bhaaw wibhor

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go mukh se nikalee chalee, wegamaee awiraam

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dharatee par haridvaar men, milaa use wishraam

·

gangaa se hee wishv men, bhaarat kee pahachaan

·

laakhon jan jutate yahaan, karate paawan snaan

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salilaa paap winaashinee, karatee rog nidaan

·

dukh haranee,sukh daayinee, detee jeewan daan

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aae jo is baar ham, gangaa maan ke

उच्च हिमालय पार कर, मैदानों की ओर।

चली मुग्ध भागीरथी, होकर भाव विभोर।

गो मुख से निकली चली, वेगमई अविराम।

धरती पर हरिद्वार में, मिला उसे विश्राम।

गंगा से ही विश्व में, भारत की पहचान।

लाखों जन जुटते यहाँ, करते पावन स्नान।

सलिला पाप विनाशिनी, करती रोग निदान।

दुख हरणी,सुख दायिनी, देती जीवन दान।

आए जो इस बार हम, गंगा माँ के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗