कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २३ / ६७ № 23 of 67 रचना २३ / ६७
१५ जून २०१३ 15 June 2013 १५ जून २०१३

चली मुग्ध भागीरथी chalee mugdh bhaageerathee चली मुग्ध भागीरथी

उच्च हिमालय पार कर, मैदानों की ओर।

॥

चली मुग्ध भागीरथी, होकर भाव विभोर।

॥

गो मुख से निकली चली, वेगमई अविराम।

॥

धरती पर हरिद्वार में, मिला उसे विश्राम।

॥

गंगा से ही विश्व में, भारत की पहचान।

॥

लाखों जन जुटते यहाँ, करते पावन स्नान।

॥

सलिला पाप विनाशिनी, करती रोग निदान।

॥

दुख हरणी,सुख दायिनी, देती जीवन दान।

॥

आए जो इस बार हम, गंगा माँ के

uchch himaalay paar kar, maidaanon kee or

·

chalee mugdh bhaageerathee, hokar bhaaw wibhor

·

go mukh se nikalee chalee, wegamaee awiraam

·

dharatee par haridvaar men, milaa use wishraam

·

gangaa se hee wishv men, bhaarat kee pahachaan

·

laakhon jan jutate yahaan, karate paawan snaan

·

salilaa paap winaashinee, karatee rog nidaan

·

dukh haranee,sukh daayinee, detee jeewan daan

·

aae jo is baar ham, gangaa maan ke

उच्च हिमालय पार कर, मैदानों की ओर।

॥

चली मुग्ध भागीरथी, होकर भाव विभोर।

॥

गो मुख से निकली चली, वेगमई अविराम।

॥

धरती पर हरिद्वार में, मिला उसे विश्राम।

॥

गंगा से ही विश्व में, भारत की पहचान।

॥

लाखों जन जुटते यहाँ, करते पावन स्नान।

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सलिला पाप विनाशिनी, करती रोग निदान।

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दुख हरणी,सुख दायिनी, देती जीवन दान।

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आए जो इस बार हम, गंगा माँ के

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗