चुपके-चुपके चैत ने chupake-chupake chait ne चुपके-चुपके चैत ने
चुपके-चुपके
चैत ने, घोला अपना रंग।
और बदन की
स्वेद से, शुरू हो गई जंग।
पल-पल तपते
सूर्य की, ऐसी बिछी बिसात।
हर बाज़ी वो
जीतकर, हमें दे रहा मात।
लू लपटों
ने कर लिया, दुपहर पर अधिकार।
दिन भर
तनकर घूमता, दिनकर चौकीदार।
हरियाली
गुम हो गई, प्रखर हो गई धूप।
पीत वर्ण
अब हो चला, उद्यानों का
रूप।
व्याकुल
पंछी फिर रहे, सूखे
chupake-chupake
chait ne, gholaa apanaa rang
aur badan kee
sved se, shuroo ho gaee jang
pal-pal tapate
soory kee, aisee bichee bisaat
har baazee wo
jeetakar, hamen de rahaa maat
loo lapaton
ne kar liyaa, dupahar par adhikaar
din bhar
tanakar ghoomataa, dinakar chaukeedaar
hariyaalee
gum ho gaee, prakhar ho gaee dhoop
peet warn
ab ho chalaa, udyaanon kaa
roop
wyaakul
panchee phir rahe, sookhe
चुपके-चुपके
चैत ने, घोला अपना रंग।
और बदन की
स्वेद से, शुरू हो गई जंग।
पल-पल तपते
सूर्य की, ऐसी बिछी बिसात।
हर बाज़ी वो
जीतकर, हमें दे रहा मात।
लू लपटों
ने कर लिया, दुपहर पर अधिकार।
दिन भर
तनकर घूमता, दिनकर चौकीदार।
हरियाली
गुम हो गई, प्रखर हो गई धूप।
पीत वर्ण
अब हो चला, उद्यानों का
रूप।
व्याकुल
पंछी फिर रहे, सूखे