कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३७ / ६७ № 37 of 67 रचना ३७ / ६७
४ अप्रैल २०१४ 4 April 2014 ४ अप्रैल २०१४

चुपके-चुपके चैत ने chupake-chupake chait ne चुपके-चुपके चैत ने

चुपके-चुपके

चैत ने, घोला अपना रंग।

॥

और बदन की

स्वेद से, शुरू हो गई जंग।

॥

पल-पल तपते

सूर्य की, ऐसी बिछी बिसात।

॥

हर बाज़ी वो

जीतकर, हमें दे रहा मात।

॥

लू लपटों

ने कर लिया, दुपहर पर अधिकार।

॥

दिन भर

तनकर घूमता, दिनकर चौकीदार।

॥

हरियाली

गुम हो गई, प्रखर हो गई धूप।

॥

पीत वर्ण

अब हो चला, उद्यानों का

रूप।

॥

व्याकुल

पंछी फिर रहे, सूखे

chupake-chupake

chait ne, gholaa apanaa rang

·

aur badan kee

sved se, shuroo ho gaee jang

·

pal-pal tapate

soory kee, aisee bichee bisaat

·

har baazee wo

jeetakar, hamen de rahaa maat

·

loo lapaton

ne kar liyaa, dupahar par adhikaar

·

din bhar

tanakar ghoomataa, dinakar chaukeedaar

·

hariyaalee

gum ho gaee, prakhar ho gaee dhoop

·

peet warn

ab ho chalaa, udyaanon kaa

roop

·

wyaakul

panchee phir rahe, sookhe

चुपके-चुपके

चैत ने, घोला अपना रंग।

॥

और बदन की

स्वेद से, शुरू हो गई जंग।

॥

पल-पल तपते

सूर्य की, ऐसी बिछी बिसात।

॥

हर बाज़ी वो

जीतकर, हमें दे रहा मात।

॥

लू लपटों

ने कर लिया, दुपहर पर अधिकार।

॥

दिन भर

तनकर घूमता, दिनकर चौकीदार।

॥

हरियाली

गुम हो गई, प्रखर हो गई धूप।

॥

पीत वर्ण

अब हो चला, उद्यानों का

रूप।

॥

व्याकुल

पंछी फिर रहे, सूखे

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗