कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३७ / २०५ № 37 of 205 रचना ३७ / २०५
२ अप्रैल २०१४ 2 April 2014 २ अप्रैल २०१४

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या jisako chaahaa thaa tum wahee ho kyaa जिसको चाहा था तुम वही हो क्या

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या?

॥

मेरी हमराह,

ज़िंदगी हो क्या?

॥

कल तो हिरनी बनी उछलती रही,

॥

क्या हुआ आज,

थक गई हो क्या?

॥

ऐ बहारों की बोलती बुलबुल,

॥

क्यों हुई मौन,

बंदिनी हो क्या?

॥

ढूँढती हूँ तुम्हें उजालों में,

॥

तुम अँधेरों से जा मिली हो क्या?

॥

महफिलें अब नहीं सुहातीं तुम्हें?

॥

कोई गुज़री हुई सदी हो क्या?

॥

क्यों मेरे हौसले घटाती हो,

॥

मेरी सरकार,

दिल-जली हो क्या?

॥

प्यार से ही तो थी मिली तुमसे,

॥

खुश नहीं फिर भी, सिरफिरी हो क्या?

॥

थी नदी चंचला उफनती हुई,

॥

सागरों से भला डरी हो क्या?

॥

सुन रही हो,

कि जो कहा मैंने?

॥

कोई फरियाद अनसुनी हो क्या?

॥

“कल्पना” मैं कसूरवार नहीं,

॥

रूठकर जा रही सखी हो क्या?

॥

------कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

jisako chaahaa thaa tum wahee ho kyaa?

·

meree hamaraah,

zindagee ho kyaa?

·

kal to hiranee banee uchalatee rahee,

·

kyaa huaa aaj,

thak gaee ho kyaa?

·

ai bahaaron kee bolatee bulabul,

·

kyon huee maun,

bandinee ho kyaa?

·

dhoondhatee hoon tumhen ujaalon men,

·

tum andheron se jaa milee ho kyaa?

·

mahaphilen ab naheen suhaateen tumhen?

·

koee guzaree huee sadee ho kyaa?

·

kyon mere hausale ghataatee ho,

·

meree sarakaar,

dil-jalee ho kyaa?

·

pyaar se hee to thee milee tumase,

·

khush naheen phir bhee, siraphiree ho kyaa?

·

thee nadee chanchalaa uphanatee huee,

·

saagaron se bhalaa daree ho kyaa?

·

sun rahee ho,

ki jo kahaa mainne?

·

koee phariyaad anasunee ho kyaa?

·

“kalpanaa” main kasoorawaar naheen,

·

roothakar jaa rahee sakhee ho kyaa?

·

------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जिसको चाहा था तुम वही हो क्या?

॥

मेरी हमराह,

ज़िंदगी हो क्या?

॥

कल तो हिरनी बनी उछलती रही,

॥

क्या हुआ आज,

थक गई हो क्या?

॥

ऐ बहारों की बोलती बुलबुल,

॥

क्यों हुई मौन,

बंदिनी हो क्या?

॥

ढूँढती हूँ तुम्हें उजालों में,

॥

तुम अँधेरों से जा मिली हो क्या?

॥

महफिलें अब नहीं सुहातीं तुम्हें?

॥

कोई गुज़री हुई सदी हो क्या?

॥

क्यों मेरे हौसले घटाती हो,

॥

मेरी सरकार,

दिल-जली हो क्या?

॥

प्यार से ही तो थी मिली तुमसे,

॥

खुश नहीं फिर भी, सिरफिरी हो क्या?

॥

थी नदी चंचला उफनती हुई,

॥

सागरों से भला डरी हो क्या?

॥

सुन रही हो,

कि जो कहा मैंने?

॥

कोई फरियाद अनसुनी हो क्या?

॥

“कल्पना” मैं कसूरवार नहीं,

॥

रूठकर जा रही सखी हो क्या?

॥

------कल्पना रामानी

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प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗