कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६८ / १६४ № 68 of 164 रचना ६८ / १६४
२ अप्रैल २०१४ 2 April 2014 २ अप्रैल २०१४

खुशबू के पल भीने से khushaboo ke pal bheene se खुशबू के पल भीने से

रंग चले निज गेह, सिखाकर

॥

मत घबराना जीने से।

॥

जंग छेड़नी है देहों को

॥

सूरज,

धूप, पसीने से।

॥

शीत विदा हो गई पलटकर।

॥

लू लपटें हँस रहीं झपटकर।

॥

वनचर कैद हुए खोहों में

॥

पाखी बैठे नीड़ सिमटकर।

॥

सुबह शाम जन लिपट रहे हैं

॥

तरण ताल के सीने से।

॥

तले भुने पकवान दंग हैं।

॥

शायद इनसे लोग तंग हैं।

॥

देख रहे हैं टुकुर-टुकुर वे

॥

फल,

सलाद, रस के प्रसंग हैं।

rang chale nij geh, sikhaakar

·

mat ghabaraanaa jeene se

·

jang chedanee hai dehon ko

·

sooraj,

dhoop, paseene se

·

sheet widaa ho gaee palatakar

·

loo lapaten hans raheen jhapatakar

·

wanachar kaid hue khohon men

·

paakhee baithe need simatakar

·

subah shaam jan lipat rahe hain

·

taran taal ke seene se

·

tale bhune pakawaan dang hain

·

shaayad inase log tang hain

·

dekh rahe hain tukur-tukur we

·

phal,

salaad, ras ke prasang hain

रंग चले निज गेह, सिखाकर

॥

मत घबराना जीने से।

॥

जंग छेड़नी है देहों को

॥

सूरज,

धूप, पसीने से।

॥

शीत विदा हो गई पलटकर।

॥

लू लपटें हँस रहीं झपटकर।

॥

वनचर कैद हुए खोहों में

॥

पाखी बैठे नीड़ सिमटकर।

॥

सुबह शाम जन लिपट रहे हैं

॥

तरण ताल के सीने से।

॥

तले भुने पकवान दंग हैं।

॥

शायद इनसे लोग तंग हैं।

॥

देख रहे हैं टुकुर-टुकुर वे

॥

फल,

सलाद, रस के प्रसंग हैं।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗