कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२० / १६४ № 120 of 164 रचना १२० / १६४
६ फ़रवरी २०१६ 6 February 2016 ६ फ़रवरी २०१६

तज गर्जन घन, बरसो आओ! taj garjan ghan, baraso aao! तज गर्जन घन, बरसो आओ!

दानी! अपना वचन

निभाओ

॥

तज गर्जन घन बरसो!

॥

आओ

॥

नागफनी दे जहाँ

दिखाई

॥

वहाँ कभी तुम पाँव

न रखना

॥

कैद करें जो

तुम्हें प्रलोभन

॥

उनके घर का नमक न

चखना

॥

जड़ें बबूलों की

बिसराकर

॥

अमराई को अमिय

॥

पिलाओ!

॥

भेद भाव तो तुम्हें

न आता

॥

पर इतना मैं याद

दिलाऊँ

॥

दुआ माँगता जो कर

जोड़े

॥

उस किसान से आज

मिलाऊँ

॥

बस उसके हों खेत न

प्यासे

॥

इतना जल उसको

॥

दे आओ

॥

झील, ताल,

सागर, नदियों से

daanee! apanaa wachan

nibhaao

·

taj garjan ghan baraso!

·

aao

·

naagaphanee de jahaan

dikhaaee

·

wahaan kabhee tum paanv

n rakhanaa

·

kaid karen jo

tumhen pralobhan

·

unake ghar kaa namak n

chakhanaa

·

jaden baboolon kee

bisaraakar

·

amaraaee ko amiy

·

pilaao!

·

bhed bhaaw to tumhen

n aataa

·

par itanaa main yaad

dilaaoon

·

duaa maangataa jo kar

jode

·

us kisaan se aaj

milaaoon

·

bas usake hon khet n

pyaase

·

itanaa jal usako

·

de aao

·

jheel, taal,

saagar, nadiyon se

दानी! अपना वचन

निभाओ

॥

तज गर्जन घन बरसो!

॥

आओ

॥

नागफनी दे जहाँ

दिखाई

॥

वहाँ कभी तुम पाँव

न रखना

॥

कैद करें जो

तुम्हें प्रलोभन

॥

उनके घर का नमक न

चखना

॥

जड़ें बबूलों की

बिसराकर

॥

अमराई को अमिय

॥

पिलाओ!

॥

भेद भाव तो तुम्हें

न आता

॥

पर इतना मैं याद

दिलाऊँ

॥

दुआ माँगता जो कर

जोड़े

॥

उस किसान से आज

मिलाऊँ

॥

बस उसके हों खेत न

प्यासे

॥

इतना जल उसको

॥

दे आओ

॥

झील, ताल,

सागर, नदियों से

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗