कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४ / १६३ № 4 of 163 रचना ४ / १६३
७ नवम्बर २०१२ 7 November 2012 ७ नवम्बर २०१२

गाँवों में बस गीत रह गए gaanvon men bas geet rah gae गाँवों में बस गीत रह गए

ऊँचे पद के मद में जिनके

शहर चल दिये पाँव

नहीं चाहते कभी लौटना

वापस अपने गाँव ।

याद नहीं अब गाँव उन्हें जो

होते उनके जन्में।

फिर आने की मात-पिता को

देकर जाते कसमें।

नहीं लुभातीं आज उन्हें वो

धूल सँजोई गलियाँ।

और नहीं आसान छोडना

शहरों की रंगरलियाँ।

छोड़ चमाचम गाड़ी कैसे

चलें गली में पाँव।

फैशन भूल नए

oonche pad ke mad men jinake

·

shahar chal diye paanv

·

naheen chaahate kabhee lautanaa

·

waapas apane gaanv

·

yaad naheen ab gaanv unhen jo

·

hote unake janmen

·

phir aane kee maat-pitaa ko

·

dekar jaate kasamen

·

naheen lubhaateen aaj unhen wo

·

dhool sanjoee galiyaan

·

aur naheen aasaan chodanaa

·

shaharon kee rangaraliyaan

·

chod chamaacham gaadee kaise

·

chalen galee men paanv

·

phaishan bhool nae

ऊँचे पद के मद में जिनके

शहर चल दिये पाँव

नहीं चाहते कभी लौटना

वापस अपने गाँव ।

याद नहीं अब गाँव उन्हें जो

होते उनके जन्में।

फिर आने की मात-पिता को

देकर जाते कसमें।

नहीं लुभातीं आज उन्हें वो

धूल सँजोई गलियाँ।

और नहीं आसान छोडना

शहरों की रंगरलियाँ।

छोड़ चमाचम गाड़ी कैसे

चलें गली में पाँव।

फैशन भूल नए

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗