कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४ / १६४ № 4 of 164 रचना ४ / १६४
७ नवम्बर २०१२ 7 November 2012 ७ नवम्बर २०१२

गाँवों में बस गीत रह गए gaanvon men bas geet rah gae गाँवों में बस गीत रह गए

ऊँचे पद के मद में जिनके

॥

शहर चल दिये पाँव

॥

नहीं चाहते कभी लौटना

॥

वापस अपने गाँव ।

॥

याद नहीं अब गाँव उन्हें जो

॥

होते उनके जन्में।

॥

फिर आने की मात-पिता को

॥

देकर जाते कसमें।

॥

नहीं लुभातीं आज उन्हें वो

॥

धूल सँजोई गलियाँ।

॥

और नहीं आसान छोडना

॥

शहरों की रंगरलियाँ।

॥

छोड़ चमाचम गाड़ी कैसे

॥

चलें गली में पाँव।

॥

फैशन भूल नए

oonche pad ke mad men jinake

·

shahar chal diye paanv

·

naheen chaahate kabhee lautanaa

·

waapas apane gaanv

·

yaad naheen ab gaanv unhen jo

·

hote unake janmen

·

phir aane kee maat-pitaa ko

·

dekar jaate kasamen

·

naheen lubhaateen aaj unhen wo

·

dhool sanjoee galiyaan

·

aur naheen aasaan chodanaa

·

shaharon kee rangaraliyaan

·

chod chamaacham gaadee kaise

·

chalen galee men paanv

·

phaishan bhool nae

ऊँचे पद के मद में जिनके

॥

शहर चल दिये पाँव

॥

नहीं चाहते कभी लौटना

॥

वापस अपने गाँव ।

॥

याद नहीं अब गाँव उन्हें जो

॥

होते उनके जन्में।

॥

फिर आने की मात-पिता को

॥

देकर जाते कसमें।

॥

नहीं लुभातीं आज उन्हें वो

॥

धूल सँजोई गलियाँ।

॥

और नहीं आसान छोडना

॥

शहरों की रंगरलियाँ।

॥

छोड़ चमाचम गाड़ी कैसे

॥

चलें गली में पाँव।

॥

फैशन भूल नए

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗