कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ११ / ६३ № 11 of 63 रचना ११ / ६३
४ नवम्बर २०१२ 4 November 2012 ४ नवम्बर २०१२

शुभ दीवाली आ गई shubh deewaalee aa gaee शुभ दीवाली आ गई

शुभ

दीवाली आ गई, सजे सभी घर द्वार।

रांगोली

देहरी सजी, द्वारे वंदनवार।

द्वारे

वंदनवार, हजारों

दीप जलेंगे

लक्ष्मी

माँ को आज, पूजने सभी जुटेंगे।

पुष्प, दीप, सिंदूर, सजी पूजा की

थाली

लेकर

शुभ संदेश, आ गई शुभ दीवाली।

जगमग

तारों से भरा, सजा गगन का थाल।

आज अमावस रात है, लाई तम का

काल।

लाई

तम का काल, जले दीपक घर-घर में

और पर्व का दौर, चला हर गाँव शहर में

एक

नया उल्लास, धरा पर

shubh

deewaalee aa gaee, saje sabhee ghar dvaar

·

raangolee

deharee sajee, dvaare wandanawaar

·

dvaare

wandanawaar, hajaaron

deep jalenge

·

lakshmee

maan ko aaj, poojane sabhee jutenge

·

pushp, deep, sindoor, sajee poojaa kee

thaalee

·

lekar

shubh sandesh, aa gaee shubh deewaalee

·

jagamag

taaron se bharaa, sajaa gagan kaa thaal

·

aaj amaawas raat hai, laaee tam kaa

kaal

·

laaee

tam kaa kaal, jale deepak ghar-ghar men

·

aur parv kaa daur, chalaa har gaanv shahar men

·

ek

nayaa ullaas, dharaa par

शुभ

दीवाली आ गई, सजे सभी घर द्वार।

रांगोली

देहरी सजी, द्वारे वंदनवार।

द्वारे

वंदनवार, हजारों

दीप जलेंगे

लक्ष्मी

माँ को आज, पूजने सभी जुटेंगे।

पुष्प, दीप, सिंदूर, सजी पूजा की

थाली

लेकर

शुभ संदेश, आ गई शुभ दीवाली।

जगमग

तारों से भरा, सजा गगन का थाल।

आज अमावस रात है, लाई तम का

काल।

लाई

तम का काल, जले दीपक घर-घर में

और पर्व का दौर, चला हर गाँव शहर में

एक

नया उल्लास, धरा पर

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗