कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना १२ / ६३ № 12 of 63 रचना १२ / ६३
९ नवम्बर २०१२ 9 November 2012 ९ नवम्बर २०१२

जिस घर सजती वाटिका jis ghar sajatee waatikaa जिस घर सजती वाटिका

जिस घर सजती वाटिका, संग स्नेह के फूल।

उस घर क्यों होंगे भला, बाधाओं के शूल।

॥

बाधाओं के शूल, सदा बरबादी लाते

॥

गृहस्वामी के कष्ट, चुभन से बढ़ते जाते।

॥

कहनी इतनी बात, काँपते कांटे थर थर

॥

संग स्नेह के फूल, वाटिका सजती जिस

घर।

॥

----------------

॥

घर आँगन की वाटिका, खिली खिली है आज।

॥

माली ही यह जानता, क्या है इसका राज़।

॥

क्या है इसका राज़, उसी ने अंकुर सींचे

॥

अब तो फल का

jis ghar sajatee waatikaa, sang sneh ke phool

us ghar kyon honge bhalaa, baadhaaon ke shool

·

baadhaaon ke shool, sadaa barabaadee laate

·

griihasvaamee ke kasht, chubhan se bढ़te jaate

·

kahanee itanee baat, kaanpate kaante thar thar

·

sang sneh ke phool, waatikaa sajatee jis

ghar

·

----------------

·

ghar aangan kee waatikaa, khilee khilee hai aaj

·

maalee hee yah jaanataa, kyaa hai isakaa raaz

·

kyaa hai isakaa raaz, usee ne ankur seenche

·

ab to phal kaa

जिस घर सजती वाटिका, संग स्नेह के फूल।

उस घर क्यों होंगे भला, बाधाओं के शूल।

॥

बाधाओं के शूल, सदा बरबादी लाते

॥

गृहस्वामी के कष्ट, चुभन से बढ़ते जाते।

॥

कहनी इतनी बात, काँपते कांटे थर थर

॥

संग स्नेह के फूल, वाटिका सजती जिस

घर।

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घर आँगन की वाटिका, खिली खिली है आज।

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माली ही यह जानता, क्या है इसका राज़।

॥

क्या है इसका राज़, उसी ने अंकुर सींचे

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अब तो फल का

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗