जिस घर सजती वाटिका jis ghar sajatee waatikaa जिस घर सजती वाटिका
जिस घर सजती वाटिका, संग स्नेह के फूल।
उस घर क्यों होंगे भला, बाधाओं के शूल।
बाधाओं के शूल, सदा बरबादी लाते
गृहस्वामी के कष्ट, चुभन से बढ़ते जाते।
कहनी इतनी बात, काँपते कांटे थर थर
संग स्नेह के फूल, वाटिका सजती जिस
घर।
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घर आँगन की वाटिका, खिली खिली है आज।
माली ही यह जानता, क्या है इसका राज़।
क्या है इसका राज़, उसी ने अंकुर सींचे
अब तो फल का
jis ghar sajatee waatikaa, sang sneh ke phool
us ghar kyon honge bhalaa, baadhaaon ke shool
baadhaaon ke shool, sadaa barabaadee laate
griihasvaamee ke kasht, chubhan se bढ़te jaate
kahanee itanee baat, kaanpate kaante thar thar
sang sneh ke phool, waatikaa sajatee jis
ghar
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ghar aangan kee waatikaa, khilee khilee hai aaj
maalee hee yah jaanataa, kyaa hai isakaa raaz
kyaa hai isakaa raaz, usee ne ankur seenche
ab to phal kaa
जिस घर सजती वाटिका, संग स्नेह के फूल।
उस घर क्यों होंगे भला, बाधाओं के शूल।
बाधाओं के शूल, सदा बरबादी लाते
गृहस्वामी के कष्ट, चुभन से बढ़ते जाते।
कहनी इतनी बात, काँपते कांटे थर थर
संग स्नेह के फूल, वाटिका सजती जिस
घर।
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घर आँगन की वाटिका, खिली खिली है आज।
माली ही यह जानता, क्या है इसका राज़।
क्या है इसका राज़, उसी ने अंकुर सींचे
अब तो फल का