मन जोगी मत बन man jogee mat ban मन जोगी मत बन
कर्म बोध से नज़र
चुराकर।
मन जोगी मत बन।
जिस अनंत से
हुआ आगमन।
पुनः वहीं
जाना।
जो कुछ लिया, चुकाना भी है
तभी मोक्ष
पाना।
रहना है इस
मर्त्य-लोक में
जब तक है
जीवन।
अगर पंक है, कमल खिला दे
काँटों में कलियाँ।
सार ढूँढ निस्सार जगत से
ज्ञान असीम यहाँ।
धूप-छाँव के
अटल सत्य से
क्यों इतनी
उलझन।
स्वर्ग असीम,
karm bodh se nazar
churaakar
man jogee mat ban
jis anant se
huaa aagaman
punah waheen
jaanaa
jo kuch liyaa, chukaanaa bhee hai
tabhee moksh
paanaa
rahanaa hai is
marty-lok men
jab tak hai
jeewan
agar pank hai, kamal khilaa de
kaanton men kaliyaan
saar dhoondh nissaar jagat se
jnaan aseem yahaan
dhoop-chaanv ke
atal saty se
kyon itanee
ulajhan
svarg aseem,
कर्म बोध से नज़र
चुराकर।
मन जोगी मत बन।
जिस अनंत से
हुआ आगमन।
पुनः वहीं
जाना।
जो कुछ लिया, चुकाना भी है
तभी मोक्ष
पाना।
रहना है इस
मर्त्य-लोक में
जब तक है
जीवन।
अगर पंक है, कमल खिला दे
काँटों में कलियाँ।
सार ढूँढ निस्सार जगत से
ज्ञान असीम यहाँ।
धूप-छाँव के
अटल सत्य से
क्यों इतनी
उलझन।
स्वर्ग असीम,