कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७३ / १६३ № 73 of 163 रचना ७३ / १६३
२४ जुलाई २०१४ 24 July 2014 २४ जुलाई २०१४

बरखा रानी नाम तुम्हारे barakhaa raanee naam tumhaare बरखा रानी नाम तुम्हारे

बरखा रानी! नाम तुम्हारे

निस दिन मैंने छंद रचे।

रंग-रंग के भाव भरे

सुख-दुख के आखर चंद रचे।

पाला बदल-बदल कर मौसम

रहा लुढ़कता इधर उधर।

कहीं घटा घनघोर कहीं पर

राह देखते रहे शहर।

कहीं प्यास तो कहीं बाढ़ के

सूखे-भीगे बंद रचे।

कभी वादियों में सावन के

संग सुरों में मन झूमा।

कभी झील-तट

पर फुहार में

पाँव-पाँव पुलकित घूमा।

कहीं गजल के

barakhaa raanee! naam tumhaare

nis din mainne chand rache

·

rang-rang ke bhaaw bhare

·

sukh-dukh ke aakhar chand rache

·

paalaa badal-badal kar mausam

·

rahaa luढ़kataa idhar udhar

·

kaheen ghataa ghanaghor kaheen par

·

raah dekhate rahe shahar

·

kaheen pyaas to kaheen baaढ़ ke

·

sookhe-bheege band rache

·

kabhee waadiyon men saawan ke

·

sang suron men man jhoomaa

·

kabhee jheel-tat

par phuhaar men

·

paanv-paanv pulakit ghoomaa

·

kaheen gajal ke

बरखा रानी! नाम तुम्हारे

निस दिन मैंने छंद रचे।

रंग-रंग के भाव भरे

सुख-दुख के आखर चंद रचे।

पाला बदल-बदल कर मौसम

रहा लुढ़कता इधर उधर।

कहीं घटा घनघोर कहीं पर

राह देखते रहे शहर।

कहीं प्यास तो कहीं बाढ़ के

सूखे-भीगे बंद रचे।

कभी वादियों में सावन के

संग सुरों में मन झूमा।

कभी झील-तट

पर फुहार में

पाँव-पाँव पुलकित घूमा।

कहीं गजल के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗