सार छंद-कल की पीड़ित नारी saar chand-kal kee peedit naaree सार छंद-कल की पीड़ित नारी
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित
नारी।
कितनी
है खुश आज ओढ़कर, दुहरी
ज़िम्मेदारी।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है
भूखा।
अन्न
देखकर गोदामों में, खुलकर
हँसा बिजूखा।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने
खाई।
वे
फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह
छोटी।
कल
उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही
रोटी।
छन्न
पकैया,
chann
pakaiyaa, chann pakaiyaa, kal kee peedit
naaree
kitanee
hai khush aaj oढ़kar, duharee
zimmedaaree
chann
pakaiyaa, chann pakaiyaa, khet khadaa hai
bhookhaa
ann
dekhakar godaamon men, khulakar
hansaa bijookhaa
chann
pakaiyaa, chann pakaiyaa, phasal baaढ़ ne
khaaee
we
phaansee par jhool rahe, ye, sarve karen hawaaee
chann
pakaiyaa, chann pakaiyaa, baat naheen yah
chotee
kal
usako khaate the ham, ab, hamen khaa rahee
rotee
chann
pakaiyaa,
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित
नारी।
कितनी
है खुश आज ओढ़कर, दुहरी
ज़िम्मेदारी।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है
भूखा।
अन्न
देखकर गोदामों में, खुलकर
हँसा बिजूखा।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने
खाई।
वे
फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।
छन्न
पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह
छोटी।
कल
उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही
रोटी।
छन्न
पकैया,