कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५२ / ६७ № 52 of 67 रचना ५२ / ६७
७ अगस्त २०१४ 7 August 2014 ७ अगस्त २०१४

सार छंद-कल की पीड़ित नारी saar chand-kal kee peedit naaree सार छंद-कल की पीड़ित नारी

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित

नारी।

॥

कितनी

है खुश आज ओढ़कर, दुहरी

ज़िम्मेदारी।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है

भूखा।

॥

अन्न

देखकर गोदामों में, खुलकर

हँसा बिजूखा।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने

खाई।

॥

वे

फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह

छोटी।

॥

कल

उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही

रोटी।

॥

छन्न

पकैया,

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, kal kee peedit

naaree

·

kitanee

hai khush aaj oढ़kar, duharee

zimmedaaree

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, khet khadaa hai

bhookhaa

·

ann

dekhakar godaamon men, khulakar

hansaa bijookhaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, phasal baaढ़ ne

khaaee

·

we

phaansee par jhool rahe, ye, sarve karen hawaaee

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, baat naheen yah

chotee

·

kal

usako khaate the ham, ab, hamen khaa rahee

rotee

·

chann

pakaiyaa,

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित

नारी।

॥

कितनी

है खुश आज ओढ़कर, दुहरी

ज़िम्मेदारी।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है

भूखा।

॥

अन्न

देखकर गोदामों में, खुलकर

हँसा बिजूखा।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने

खाई।

॥

वे

फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।

॥

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह

छोटी।

॥

कल

उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही

रोटी।

॥

छन्न

पकैया,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗