कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५१ / ६५ № 51 of 65 रचना ५१ / ६५
७ अगस्त २०१४ 7 August 2014 ७ अगस्त २०१४

सार छंद-कल की पीड़ित नारी saar chand-kal kee peedit naaree सार छंद-कल की पीड़ित नारी

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित

नारी।

कितनी

है खुश आज ओढ़कर, दुहरी

ज़िम्मेदारी।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है

भूखा।

अन्न

देखकर गोदामों में, खुलकर

हँसा बिजूखा।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने

खाई।

वे

फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह

छोटी।

कल

उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही

रोटी।

छन्न

पकैया,

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, kal kee peedit

naaree

·

kitanee

hai khush aaj oढ़kar, duharee

zimmedaaree

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, khet khadaa hai

bhookhaa

·

ann

dekhakar godaamon men, khulakar

hansaa bijookhaa

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, phasal baaढ़ ne

khaaee

·

we

phaansee par jhool rahe, ye, sarve karen hawaaee

·

chann

pakaiyaa, chann pakaiyaa, baat naheen yah

chotee

·

kal

usako khaate the ham, ab, hamen khaa rahee

rotee

·

chann

pakaiyaa,

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, कल की पीड़ित

नारी।

कितनी

है खुश आज ओढ़कर, दुहरी

ज़िम्मेदारी।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, खेत खड़ा है

भूखा।

अन्न

देखकर गोदामों में, खुलकर

हँसा बिजूखा।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, फसल बाढ़ ने

खाई।

वे

फाँसी पर झूल रहे, ये, सर्वे करें हवाई।

छन्न

पकैया, छन्न पकैया, बात नहीं यह

छोटी।

कल

उसको खाते थे हम, अब, हमें खा रही

रोटी।

छन्न

पकैया,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗