कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १३ / ६५ № 13 of 65 रचना १३ / ६५
२८ अक्तूबर २०१२ 28 October 2012 २८ अक्तूबर २०१२

योग स्वास्थ्य का मूल है yog svaasthy kaa mool hai योग स्वास्थ्य का मूल है

योग स्वास्थ्य का मूल है, प्रात भ्रमण है प्राण।

रहे निरोगी तन सदा, मिले कष्ट से

त्राण।

सहज हास्य से हो अगर, हर दिन की शुरुआत।

शुद्ध रक्त संचार हो, रोग करे नहिं घात।

प्रेम रसों से सींचिए, जीवन का उद्यान।

खुशियों के अंकुर उगें, मिले सुफल वरदान।

पर हित को तत्पर रहें, बड़े पुण्य का काम।

मान बढ़ेगा आपका, होगा ऊँचा नाम।

तीखी

yog svaasthy kaa mool hai, praat bhraman hai praan

rahe nirogee tan sadaa, mile kasht se

traan

·

sahaj haasy se ho agar, har din kee shuruaat

·

shuddh rakt sanchaar ho, rog kare nahin ghaat

·

prem rason se seenchie, jeewan kaa udyaan

·

khushiyon ke ankur ugen, mile suphal waradaan

·

par hit ko tatpar rahen, bade puny kaa kaam

·

maan bढ़egaa aapakaa, hogaa oonchaa naam

·

teekhee

योग स्वास्थ्य का मूल है, प्रात भ्रमण है प्राण।

रहे निरोगी तन सदा, मिले कष्ट से

त्राण।

सहज हास्य से हो अगर, हर दिन की शुरुआत।

शुद्ध रक्त संचार हो, रोग करे नहिं घात।

प्रेम रसों से सींचिए, जीवन का उद्यान।

खुशियों के अंकुर उगें, मिले सुफल वरदान।

पर हित को तत्पर रहें, बड़े पुण्य का काम।

मान बढ़ेगा आपका, होगा ऊँचा नाम।

तीखी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗