विस्मित कुदरत पूछ रही है wismit kudarat pooch rahee hai विस्मित कुदरत पूछ रही है
शुद्ध हवा को लील रही हैं
ऊँची-ऊँची इमारतें।
घर तो बदल गए पिंजड़ों में
पंख कटे पंछी इंसान।
हवा विषैली नभ तक फैली
पंख पखेरू भी हैरान।
मानव ने ही स्वयं जुटाए
अपनी आफत के सामान।
अब तो पोर पोर पर दिखतीं
थकी थकी सी इबारतें।
कल पुर्जों में बदली काया
है विज्ञान बना मोहरा।
विध्वंसों का निर्माणों पर
हावी हुआ घना कोहरा।
कान फाड़ता शोर असीमित
shuddh hawaa ko leel rahee hain
oonchee-oonchee imaaraten
ghar to badal gae pinjadon men
pankh kate panchee insaan
hawaa wishailee nabh tak phailee
pankh pakheroo bhee hairaan
maanaw ne hee svayan jutaae
apanee aaphat ke saamaan
ab to por por par dikhateen
thakee thakee see ibaaraten
kal purjon men badalee kaayaa
hai wijnaan banaa moharaa
widhvanson kaa nirmaanon par
haawee huaa ghanaa koharaa
kaan phaadataa shor aseemit
शुद्ध हवा को लील रही हैं
ऊँची-ऊँची इमारतें।
घर तो बदल गए पिंजड़ों में
पंख कटे पंछी इंसान।
हवा विषैली नभ तक फैली
पंख पखेरू भी हैरान।
मानव ने ही स्वयं जुटाए
अपनी आफत के सामान।
अब तो पोर पोर पर दिखतीं
थकी थकी सी इबारतें।
कल पुर्जों में बदली काया
है विज्ञान बना मोहरा।
विध्वंसों का निर्माणों पर
हावी हुआ घना कोहरा।
कान फाड़ता शोर असीमित