कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९९ / १६३ № 99 of 163 रचना ९९ / १६३
१८ जनवरी २०१५ 18 January 2015 १८ जनवरी २०१५

हमें बुलाते बाग-बगीचे hamen bulaate baag-bageeche हमें बुलाते बाग-बगीचे

सुबह-सुबह जब

चिड़ियाँ गातीं

हमें बुलाते बाग

बगीचे।

ले आता सूरज भी

अपनी

धवल धूप का सुंदर

टुकड़ा

साथ चमकता पथ जब

चलता

कुसुमाकर दिखता हर

मुखड़ा

नज़रों को देते

नज़राना

हरीतिमा से गुंथे

गलीचे।

दिन में तो लटकाए

रखते

ऊँचे खूँटे इमारतों के

गीत रचा करती तन्हाई

भूली बिसरी इबारतों

के

लेकिन खुशबू वाले कुछ पल

हाथ थाम ले जाते

नीचे।

subah-subah jab

chidiyaan gaateen

·

hamen bulaate baag

·

bageeche

·

le aataa sooraj bhee

apanee

·

dhawal dhoop kaa sundar

tukadaa

·

saath chamakataa path jab

chalataa

·

kusumaakar dikhataa har

mukhadaa

·

nazaron ko dete

nazaraanaa

·

hareetimaa se gunthe

·

galeeche

·

din men to latakaae

rakhate

·

oonche khoonte imaaraton ke

·

geet rachaa karatee tanhaaee

·

bhoolee bisaree ibaaraton

ke

·

lekin khushaboo waale kuch pal

·

haath thaam le jaate

·

neeche

सुबह-सुबह जब

चिड़ियाँ गातीं

हमें बुलाते बाग

बगीचे।

ले आता सूरज भी

अपनी

धवल धूप का सुंदर

टुकड़ा

साथ चमकता पथ जब

चलता

कुसुमाकर दिखता हर

मुखड़ा

नज़रों को देते

नज़राना

हरीतिमा से गुंथे

गलीचे।

दिन में तो लटकाए

रखते

ऊँचे खूँटे इमारतों के

गीत रचा करती तन्हाई

भूली बिसरी इबारतों

के

लेकिन खुशबू वाले कुछ पल

हाथ थाम ले जाते

नीचे।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗