हमें बुलाते बाग-बगीचे hamen bulaate baag-bageeche हमें बुलाते बाग-बगीचे
सुबह-सुबह जब
चिड़ियाँ गातीं
हमें बुलाते बाग
बगीचे।
ले आता सूरज भी
अपनी
धवल धूप का सुंदर
टुकड़ा
साथ चमकता पथ जब
चलता
कुसुमाकर दिखता हर
मुखड़ा
नज़रों को देते
नज़राना
हरीतिमा से गुंथे
गलीचे।
दिन में तो लटकाए
रखते
ऊँचे खूँटे इमारतों के
गीत रचा करती तन्हाई
भूली बिसरी इबारतों
के
लेकिन खुशबू वाले कुछ पल
हाथ थाम ले जाते
नीचे।
subah-subah jab
chidiyaan gaateen
hamen bulaate baag
bageeche
le aataa sooraj bhee
apanee
dhawal dhoop kaa sundar
tukadaa
saath chamakataa path jab
chalataa
kusumaakar dikhataa har
mukhadaa
nazaron ko dete
nazaraanaa
hareetimaa se gunthe
galeeche
din men to latakaae
rakhate
oonche khoonte imaaraton ke
geet rachaa karatee tanhaaee
bhoolee bisaree ibaaraton
ke
lekin khushaboo waale kuch pal
haath thaam le jaate
neeche
सुबह-सुबह जब
चिड़ियाँ गातीं
हमें बुलाते बाग
बगीचे।
ले आता सूरज भी
अपनी
धवल धूप का सुंदर
टुकड़ा
साथ चमकता पथ जब
चलता
कुसुमाकर दिखता हर
मुखड़ा
नज़रों को देते
नज़राना
हरीतिमा से गुंथे
गलीचे।
दिन में तो लटकाए
रखते
ऊँचे खूँटे इमारतों के
गीत रचा करती तन्हाई
भूली बिसरी इबारतों
के
लेकिन खुशबू वाले कुछ पल
हाथ थाम ले जाते
नीचे।