छाँव निगलकर हँसता सूरज chaanv nigalakar hansataa sooraj छाँव निगलकर हँसता सूरज
छाँव निगलकर हँसता सूरज,
उगल रहा है धूप।
शीतलता को रखा कैद में,
गर्मी लाया साथ।
तप्त दुपहरी रानी बनकर,
बाँट रही सौगात।
फ्रूट-चाट, कुल्फी, ठंडाई,
सभी सुहाने रूप।
रातें छोटी दिन हैं लंबे,
लू का बढ़ा प्रकोप।
घने पेड़ भी तपे आग से,
शीत हवा का लोप।
चीं चीं, चूँ चूँ, काँव काँव सब,
ढूंढ रहे नल कूप।
सड़क किनारे ठेले वाले,
राहत लिए खड़े।
जन-जन के तर कंठ कर रहे,
जल से भरे घड़े।
दही,
chaanv nigalakar hansataa sooraj,
ugal rahaa hai dhoop
sheetalataa ko rakhaa kaid men,
garmee laayaa saath
tapt dupaharee raanee banakar,
baant rahee saugaat
phroot-chaat, kulphee, thandaaee,
sabhee suhaane roop
raaten chotee din hain lanbe,
loo kaa bढ़aa prakop
ghane ped bhee tape aag se,
sheet hawaa kaa lop
cheen cheen, choon choon, kaanv kaanv sab,
dhoondh rahe nal koop
sadak kinaare thele waale,
raahat lie khade
jan-jan ke tar kanth kar rahe,
jal se bhare ghade
dahee,
छाँव निगलकर हँसता सूरज,
उगल रहा है धूप।
शीतलता को रखा कैद में,
गर्मी लाया साथ।
तप्त दुपहरी रानी बनकर,
बाँट रही सौगात।
फ्रूट-चाट, कुल्फी, ठंडाई,
सभी सुहाने रूप।
रातें छोटी दिन हैं लंबे,
लू का बढ़ा प्रकोप।
घने पेड़ भी तपे आग से,
शीत हवा का लोप।
चीं चीं, चूँ चूँ, काँव काँव सब,
ढूंढ रहे नल कूप।
सड़क किनारे ठेले वाले,
राहत लिए खड़े।
जन-जन के तर कंठ कर रहे,
जल से भरे घड़े।
दही,