गुल कनेर यादों में छाया gul kaner yaadon men chaayaa गुल कनेर यादों में छाया
तपती देख धरा की काया।
गुल कनेर यादों में छाया।
प्यारा था वो गाँव सलोना।
भाता था फूलों का होना।
घर के सम्मुख गुलबगिया में,
था कनेर का भी इक कोना।
जिसके बहुरंगी फूलों ने,
सदा प्रकृति से प्रेम सिखाया।
भरे ग्रीष्म में छैल छबीले।
श्वेत, लाल, केसरिया, पीले।
बंजारे, बस जाते थे ये,
पुनः पेड़ पर बना कबीले।
इन अपनों से खेल खेल में,
झोली भर अपनापन पाया।
tapatee dekh dharaa kee kaayaa
gul kaner yaadon men chaayaa
pyaaraa thaa wo gaanv salonaa
bhaataa thaa phoolon kaa honaa
ghar ke sammukh gulabagiyaa men,
thaa kaner kaa bhee ik konaa
jisake bahurangee phoolon ne,
sadaa prakriiti se prem sikhaayaa
bhare greeshm men chail chabeele
shvet, laal, kesariyaa, peele
banjaare, bas jaate the ye,
punah ped par banaa kabeele
in apanon se khel khel men,
jholee bhar apanaapan paayaa
तपती देख धरा की काया।
गुल कनेर यादों में छाया।
प्यारा था वो गाँव सलोना।
भाता था फूलों का होना।
घर के सम्मुख गुलबगिया में,
था कनेर का भी इक कोना।
जिसके बहुरंगी फूलों ने,
सदा प्रकृति से प्रेम सिखाया।
भरे ग्रीष्म में छैल छबीले।
श्वेत, लाल, केसरिया, पीले।
बंजारे, बस जाते थे ये,
पुनः पेड़ पर बना कबीले।
इन अपनों से खेल खेल में,
झोली भर अपनापन पाया।