कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०९ / १६४ № 109 of 164 रचना १०९ / १६४
३ अप्रैल २०१५ 3 April 2015 ३ अप्रैल २०१५

गुल कनेर यादों में छाया gul kaner yaadon men chaayaa गुल कनेर यादों में छाया

तपती देख धरा की काया।

॥

गुल कनेर यादों में छाया।

॥

प्यारा था वो गाँव सलोना।

॥

भाता था फूलों का होना।

॥

घर के सम्मुख गुलबगिया में,

॥

था कनेर का भी इक कोना।

॥

जिसके बहुरंगी फूलों ने,

॥

सदा प्रकृति से प्रेम सिखाया।

॥

भरे ग्रीष्म में छैल छबीले।

॥

श्वेत, लाल, केसरिया, पीले।

॥

बंजारे, बस जाते थे ये,

॥

पुनः पेड़ पर बना कबीले।

॥

इन अपनों से खेल खेल में,

॥

झोली भर अपनापन पाया।

tapatee dekh dharaa kee kaayaa

·

gul kaner yaadon men chaayaa

·

pyaaraa thaa wo gaanv salonaa

·

bhaataa thaa phoolon kaa honaa

·

ghar ke sammukh gulabagiyaa men,

·

thaa kaner kaa bhee ik konaa

·

jisake bahurangee phoolon ne,

·

sadaa prakriiti se prem sikhaayaa

·

bhare greeshm men chail chabeele

·

shvet, laal, kesariyaa, peele

·

banjaare, bas jaate the ye,

·

punah ped par banaa kabeele

·

in apanon se khel khel men,

·

jholee bhar apanaapan paayaa

तपती देख धरा की काया।

॥

गुल कनेर यादों में छाया।

॥

प्यारा था वो गाँव सलोना।

॥

भाता था फूलों का होना।

॥

घर के सम्मुख गुलबगिया में,

॥

था कनेर का भी इक कोना।

॥

जिसके बहुरंगी फूलों ने,

॥

सदा प्रकृति से प्रेम सिखाया।

॥

भरे ग्रीष्म में छैल छबीले।

॥

श्वेत, लाल, केसरिया, पीले।

॥

बंजारे, बस जाते थे ये,

॥

पुनः पेड़ पर बना कबीले।

॥

इन अपनों से खेल खेल में,

॥

झोली भर अपनापन पाया।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗