कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ८४ / २०५ № 84 of 205 रचना ८४ / २०५
४ अप्रैल २०१५ 4 April 2015 ४ अप्रैल २०१५

मुझे पीपल बुलाता है mujhe peepal bulaataa hai मुझे पीपल बुलाता है

प्रखरतम धूप बन राहों में,

जब सूरज सताता है।

॥

कहीं से दे मुझे आवाज़,

तब पीपल बुलाता है।

॥

ये न्यायाधीश मेरे गाँव का,

अपनी अदालत में,

॥

सभी दंगे फ़सादों का,

पलों में हल सुझाता है।

॥

कुमारी माँगती साथी,

विवाहित वर सुहागन का,

॥

है पूजित विष्णु सम देवा,

सदा वरदान दाता है।

॥

बड़े बूढ़ों की ये चौपाल,

बचपन का बने झूला,

॥

बसेरा पाखियों का भी, सहज

छाया लुटाता है।

॥

नवेली कोपलें धानी,

जनों को बाँटतीं जीवन,

॥

पके फल से हृदय-रोगी,

असीमित शान्ति पाता है।

॥

युगों से यज्ञ का इक अंग,

हैं समिधाएँ पीपल की,

॥

इसी के पात हाथी चाव से,

खुश हो चबाता है।

॥

घनी चाहे नहीं छाया,

मगर पत्ते चपल, कोमल,

॥

हवाओं को प्रदूषण से, ये

बन प्रहरी बचाता है।

॥

मनुष इसकी विमल मन से,

करे जो ‘कल्पना’ सेवा,

॥

भुवन की व्याधियों से इस,

जनम में मोक्ष पाता है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

prakharatam dhoop ban raahon men,

jab sooraj sataataa hai

·

kaheen se de mujhe aawaaz,

tab peepal bulaataa hai

·

ye nyaayaadheesh mere gaanv kaa,

apanee adaalat men,

·

sabhee dange fasaadon kaa,

palon men hal sujhaataa hai

·

kumaaree maangatee saathee,

wiwaahit war suhaagan kaa,

·

hai poojit wishnu sam dewaa,

sadaa waradaan daataa hai

·

bade booढ़on kee ye chaupaal,

bachapan kaa bane jhoolaa,

·

baseraa paakhiyon kaa bhee, sahaj

chaayaa lutaataa hai

·

nawelee kopalen dhaanee,

janon ko baantateen jeewan,

·

pake phal se hriiday-rogee,

aseemit shaanti paataa hai

·

yugon se yajn kaa ik ang,

hain samidhaaen peepal kee,

·

isee ke paat haathee chaaw se,

khush ho chabaataa hai

·

ghanee chaahe naheen chaayaa,

magar patte chapal, komal,

·

hawaaon ko pradooshan se, ye

ban praharee bachaataa hai

·

manush isakee wimal man se,

kare jo ‘kalpanaa’ sewaa,

·

bhuwan kee wyaadhiyon se is,

janam men moksh paataa hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

प्रखरतम धूप बन राहों में,

जब सूरज सताता है।

॥

कहीं से दे मुझे आवाज़,

तब पीपल बुलाता है।

॥

ये न्यायाधीश मेरे गाँव का,

अपनी अदालत में,

॥

सभी दंगे फ़सादों का,

पलों में हल सुझाता है।

॥

कुमारी माँगती साथी,

विवाहित वर सुहागन का,

॥

है पूजित विष्णु सम देवा,

सदा वरदान दाता है।

॥

बड़े बूढ़ों की ये चौपाल,

बचपन का बने झूला,

॥

बसेरा पाखियों का भी, सहज

छाया लुटाता है।

॥

नवेली कोपलें धानी,

जनों को बाँटतीं जीवन,

॥

पके फल से हृदय-रोगी,

असीमित शान्ति पाता है।

॥

युगों से यज्ञ का इक अंग,

हैं समिधाएँ पीपल की,

॥

इसी के पात हाथी चाव से,

खुश हो चबाता है।

॥

घनी चाहे नहीं छाया,

मगर पत्ते चपल, कोमल,

॥

हवाओं को प्रदूषण से, ये

बन प्रहरी बचाता है।

॥

मनुष इसकी विमल मन से,

करे जो ‘कल्पना’ सेवा,

॥

भुवन की व्याधियों से इस,

जनम में मोक्ष पाता है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗