कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ८५ / २०५ № 85 of 205 रचना ८५ / २०५
१२ अप्रैल २०१५ 12 April 2015 १२ अप्रैल २०१५

हमें रसातल दिखा रही कुदरत hamen rasaatal dikhaa rahee kudarat हमें रसातल दिखा रही कुदरत

हरी

चदरिया तहा रही कुदरत

॥

सबक

हमें अब सिखा रही कुदरत

॥

विष-बेलें

तो हमने ही बोईं

॥

उनका ही विष पिला रही कुदरत

॥

उँगली-इशारा देख

न पाए हम

॥

अब

उँगली पर नचा रही कुदरत

॥

धूल

बना दी हमने नम माटी

॥

हमें

धूल अब चटा रही कुदरत

॥

हमने

उसका रस निचोड़ डाला

॥

हमें

रसातल दिखा रही कुदरत

॥

हाथ

छुड़ाया उससे मैत्री का

॥

अब

तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

॥

हमने

उसके लिए कुआँ खोदा

॥

खाई

में हमें धका रही कुदरत

॥

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

॥

अब हमको ही सता रही कुदरत

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

haree

chadariyaa tahaa rahee kudarat

·

sabak

hamen ab sikhaa rahee kudarat

·

wish-belen

to hamane hee boeen

·

unakaa hee wish pilaa rahee kudarat

·

ungalee-ishaaraa dekh

n paae ham

·

ab

ungalee par nachaa rahee kudarat

·

dhool

banaa dee hamane nam maatee

·

hamen

dhool ab chataa rahee kudarat

·

hamane

usakaa ras nichod daalaa

·

hamen

rasaatal dikhaa rahee kudarat

·

haath

chudaayaa usase maitree kaa

·

ab

to chakke chudaa rahee kudarat

·

hamane

usake lie kuaan khodaa

·

khaaee

men hamen dhakaa rahee kudarat

·

hamane 'kalpanaa' use sataayaa hai

·

ab hamako hee sataa rahee kudarat

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हरी

चदरिया तहा रही कुदरत

॥

सबक

हमें अब सिखा रही कुदरत

॥

विष-बेलें

तो हमने ही बोईं

॥

उनका ही विष पिला रही कुदरत

॥

उँगली-इशारा देख

न पाए हम

॥

अब

उँगली पर नचा रही कुदरत

॥

धूल

बना दी हमने नम माटी

॥

हमें

धूल अब चटा रही कुदरत

॥

हमने

उसका रस निचोड़ डाला

॥

हमें

रसातल दिखा रही कुदरत

॥

हाथ

छुड़ाया उससे मैत्री का

॥

अब

तो छक्के छुड़ा रही कुदरत

॥

हमने

उसके लिए कुआँ खोदा

॥

खाई

में हमें धका रही कुदरत

॥

हमने 'कल्पना' उसे सताया है

॥

अब हमको ही सता रही कुदरत

॥

- कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗