भूखों को रिझाते वे bhookhon ko rijhaate we भूखों को रिझाते वे
भूखों
को रिझाते वे, रोटी की मुनादी से।
प्यासों
को पिलाते हैं, वादों की सुराही से।
ख्वाबों
में गरम गुदड़ी, जिनको न हुई हासिल
ख्वाब
उनके सजाते वे, रेशम की रजाई से।
कुहरा
हो या पाला हो, उनकी हैं सुखद सेजें
फुटपाथ
इन्हें ढँकते, चिथड़ों की चटाई से।
होते
हैं सुखद सर्वे सुखियों के गगन में तब
दो
हाथ दुखी करते, जब बाढ़ सुनामी से।
फसलें
तो उगाते ये, दानों पे दखल उनका
मौत
इनसे गले मिलकर, फुसलाती है फाँसी से।
मरते
हैं या जीते ये, खुदगर्ज़ खबर क्यों लें?
उनको
तो गरज अपनी, खबरों की छपाई से।
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
bhookhon
ko rijhaate we, rotee kee munaadee se
pyaason
ko pilaate hain, waadon kee suraahee se
khvaabon
men garam gudadee, jinako n huee haasil
khvaab
unake sajaate we, resham kee rajaaee se
kuharaa
ho yaa paalaa ho, unakee hain sukhad sejen
phutapaath
inhen dhankate, chithadon kee chataaee se
hote
hain sukhad sarve sukhiyon ke gagan men tab
do
haath dukhee karate, jab baaढ़ sunaamee se
phasalen
to ugaate ye, daanon pe dakhal unakaa
maut
inase gale milakar, phusalaatee hai phaansee se
marate
hain yaa jeete ye, khudagarz khabar kyon len?
unako
to garaj apanee, khabaron kee chapaaee se
--kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
भूखों
को रिझाते वे, रोटी की मुनादी से।
प्यासों
को पिलाते हैं, वादों की सुराही से।
ख्वाबों
में गरम गुदड़ी, जिनको न हुई हासिल
ख्वाब
उनके सजाते वे, रेशम की रजाई से।
कुहरा
हो या पाला हो, उनकी हैं सुखद सेजें
फुटपाथ
इन्हें ढँकते, चिथड़ों की चटाई से।
होते
हैं सुखद सर्वे सुखियों के गगन में तब
दो
हाथ दुखी करते, जब बाढ़ सुनामी से।
फसलें
तो उगाते ये, दानों पे दखल उनका
मौत
इनसे गले मिलकर, फुसलाती है फाँसी से।
मरते
हैं या जीते ये, खुदगर्ज़ खबर क्यों लें?
उनको
तो गरज अपनी, खबरों की छपाई से।
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी