कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०० / १६४ № 100 of 164 रचना १०० / १६४
२१ जनवरी २०१५ 21 January 2015 २१ जनवरी २०१५

लौट आए दिन बसंती laut aae din basantee लौट आए दिन बसंती

आसमाँ से धुंध के

पट खोलकर फिर

॥

लौट आए दिन बसंती

॥

ख्वाब वाले

॥

कन्दरा से कोकिला

का

॥

मौन बोला

॥

कर बढ़ा अमराइयों ने

॥

द्वार खोला

॥

आम्र-बौरों ने धरा

के

॥

चरण चूमें

॥

गा उठी ऋतु, पीतवर्णी

॥

ओढ़ चोला

॥

क्रूर मौसम के किले

को तोड़कर फिर

॥

मुस्कुराए दिन

सुनहरी

॥

आब वाले

॥

बाग की तनहाइयाँ

फिर

॥

गुनगुनाईं

॥

भँवरों ने कलिकाओं

से

॥

आँखें लड़ाईं

॥

रस भरे ऋतुराज की

खातिर

॥

गुलों ने

॥

अल्पनाएँ,

aasamaan se dhundh ke

pat kholakar phir

·

laut aae din basantee

·

khvaab waale

·

kandaraa se kokilaa

kaa

·

maun bolaa

·

kar bढ़aa amaraaiyon ne

·

dvaar kholaa

·

aamr-bauron ne dharaa

ke

·

charan choomen

·

gaa uthee riitu, peetawarnee

·

oढ़ cholaa

·

kroor mausam ke kile

ko todakar phir

·

muskuraae din

sunaharee

·

aab waale

·

baag kee tanahaaiyaan

phir

·

gunagunaaeen

·

bhanvaron ne kalikaaon

se

·

aankhen ladaaeen

·

ras bhare riituraaj kee

khaatir

·

gulon ne

·

alpanaaen,

आसमाँ से धुंध के

पट खोलकर फिर

॥

लौट आए दिन बसंती

॥

ख्वाब वाले

॥

कन्दरा से कोकिला

का

॥

मौन बोला

॥

कर बढ़ा अमराइयों ने

॥

द्वार खोला

॥

आम्र-बौरों ने धरा

के

॥

चरण चूमें

॥

गा उठी ऋतु, पीतवर्णी

॥

ओढ़ चोला

॥

क्रूर मौसम के किले

को तोड़कर फिर

॥

मुस्कुराए दिन

सुनहरी

॥

आब वाले

॥

बाग की तनहाइयाँ

फिर

॥

गुनगुनाईं

॥

भँवरों ने कलिकाओं

से

॥

आँखें लड़ाईं

॥

रस भरे ऋतुराज की

खातिर

॥

गुलों ने

॥

अल्पनाएँ,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗