कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०० / १६३ № 100 of 163 रचना १०० / १६३
२१ जनवरी २०१५ 21 January 2015 २१ जनवरी २०१५

लौट आए दिन बसंती laut aae din basantee लौट आए दिन बसंती

आसमाँ से धुंध के

पट खोलकर फिर

लौट आए दिन बसंती

ख्वाब वाले

कन्दरा से कोकिला

का

मौन बोला

कर बढ़ा अमराइयों ने

द्वार खोला

आम्र-बौरों ने धरा

के

चरण चूमें

गा उठी ऋतु, पीतवर्णी

ओढ़ चोला

क्रूर मौसम के किले

को तोड़कर फिर

मुस्कुराए दिन

सुनहरी

आब वाले

बाग की तनहाइयाँ

फिर

गुनगुनाईं

भँवरों ने कलिकाओं

से

आँखें लड़ाईं

रस भरे ऋतुराज की

खातिर

गुलों ने

अल्पनाएँ,

aasamaan se dhundh ke

pat kholakar phir

·

laut aae din basantee

·

khvaab waale

·

kandaraa se kokilaa

kaa

·

maun bolaa

·

kar bढ़aa amaraaiyon ne

·

dvaar kholaa

·

aamr-bauron ne dharaa

ke

·

charan choomen

·

gaa uthee riitu, peetawarnee

·

oढ़ cholaa

·

kroor mausam ke kile

ko todakar phir

·

muskuraae din

sunaharee

·

aab waale

·

baag kee tanahaaiyaan

phir

·

gunagunaaeen

·

bhanvaron ne kalikaaon

se

·

aankhen ladaaeen

·

ras bhare riituraaj kee

khaatir

·

gulon ne

·

alpanaaen,

आसमाँ से धुंध के

पट खोलकर फिर

लौट आए दिन बसंती

ख्वाब वाले

कन्दरा से कोकिला

का

मौन बोला

कर बढ़ा अमराइयों ने

द्वार खोला

आम्र-बौरों ने धरा

के

चरण चूमें

गा उठी ऋतु, पीतवर्णी

ओढ़ चोला

क्रूर मौसम के किले

को तोड़कर फिर

मुस्कुराए दिन

सुनहरी

आब वाले

बाग की तनहाइयाँ

फिर

गुनगुनाईं

भँवरों ने कलिकाओं

से

आँखें लड़ाईं

रस भरे ऋतुराज की

खातिर

गुलों ने

अल्पनाएँ,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗