लौट आए दिन बसंती laut aae din basantee लौट आए दिन बसंती
आसमाँ से धुंध के
पट खोलकर फिर
लौट आए दिन बसंती
ख्वाब वाले
कन्दरा से कोकिला
का
मौन बोला
कर बढ़ा अमराइयों ने
द्वार खोला
आम्र-बौरों ने धरा
के
चरण चूमें
गा उठी ऋतु, पीतवर्णी
ओढ़ चोला
क्रूर मौसम के किले
को तोड़कर फिर
मुस्कुराए दिन
सुनहरी
आब वाले
बाग की तनहाइयाँ
फिर
गुनगुनाईं
भँवरों ने कलिकाओं
से
आँखें लड़ाईं
रस भरे ऋतुराज की
खातिर
गुलों ने
अल्पनाएँ,
aasamaan se dhundh ke
pat kholakar phir
laut aae din basantee
khvaab waale
kandaraa se kokilaa
kaa
maun bolaa
kar bढ़aa amaraaiyon ne
dvaar kholaa
aamr-bauron ne dharaa
ke
charan choomen
gaa uthee riitu, peetawarnee
oढ़ cholaa
kroor mausam ke kile
ko todakar phir
muskuraae din
sunaharee
aab waale
baag kee tanahaaiyaan
phir
gunagunaaeen
bhanvaron ne kalikaaon
se
aankhen ladaaeen
ras bhare riituraaj kee
khaatir
gulon ne
alpanaaen,
आसमाँ से धुंध के
पट खोलकर फिर
लौट आए दिन बसंती
ख्वाब वाले
कन्दरा से कोकिला
का
मौन बोला
कर बढ़ा अमराइयों ने
द्वार खोला
आम्र-बौरों ने धरा
के
चरण चूमें
गा उठी ऋतु, पीतवर्णी
ओढ़ चोला
क्रूर मौसम के किले
को तोड़कर फिर
मुस्कुराए दिन
सुनहरी
आब वाले
बाग की तनहाइयाँ
फिर
गुनगुनाईं
भँवरों ने कलिकाओं
से
आँखें लड़ाईं
रस भरे ऋतुराज की
खातिर
गुलों ने
अल्पनाएँ,