कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६७ / १६३ № 67 of 163 रचना ६७ / १६३
३० मार्च २०१४ 30 March 2014 ३० मार्च २०१४

गीत कोकिला गाती रहना geet kokilaa gaatee rahanaa गीत कोकिला गाती रहना

बने रहें ये दिन बसंत के

गीत कोकिला गाती

रहना।

मंथर होती गति जीवन की

नई उमंगों से भर जाती।

कुंद जड़ें भी होतीं स्पंदित

वसुधा मंद-मंद मुसकाती।

देखो जोग न ले अमराई

उससे प्रीत जताती

रहना।

बोल तुम्हारे सखी घोलते

जग में अमृत-रस की धारा।

प्रेम-नगर बन जाती जगती

समय ठहर जाता बंजारा।

झाँक सकें ना ज्यों अँधियारे

तुम प्रकाश बन आती

bane rahen ye din basant ke

·

geet kokilaa gaatee

·

rahanaa

·

manthar hotee gati jeewan kee

·

naee umangon se bhar jaatee

·

kund jaden bhee hoteen spandit

·

wasudhaa mand-mand musakaatee

·

dekho jog n le amaraaee

·

usase preet jataatee

·

rahanaa

·

bol tumhaare sakhee gholate

·

jag men amriit-ras kee dhaaraa

·

prem-nagar ban jaatee jagatee

·

samay thahar jaataa banjaaraa

·

jhaank saken naa jyon andhiyaare

·

tum prakaash ban aatee

बने रहें ये दिन बसंत के

गीत कोकिला गाती

रहना।

मंथर होती गति जीवन की

नई उमंगों से भर जाती।

कुंद जड़ें भी होतीं स्पंदित

वसुधा मंद-मंद मुसकाती।

देखो जोग न ले अमराई

उससे प्रीत जताती

रहना।

बोल तुम्हारे सखी घोलते

जग में अमृत-रस की धारा।

प्रेम-नगर बन जाती जगती

समय ठहर जाता बंजारा।

झाँक सकें ना ज्यों अँधियारे

तुम प्रकाश बन आती

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗