कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६७ / १६४ № 67 of 164 रचना ६७ / १६४
३० मार्च २०१४ 30 March 2014 ३० मार्च २०१४

गीत कोकिला गाती रहना geet kokilaa gaatee rahanaa गीत कोकिला गाती रहना

बने रहें ये दिन बसंत के

॥

गीत कोकिला गाती

॥

रहना।

॥

मंथर होती गति जीवन की

॥

नई उमंगों से भर जाती।

॥

कुंद जड़ें भी होतीं स्पंदित

॥

वसुधा मंद-मंद मुसकाती।

॥

देखो जोग न ले अमराई

॥

उससे प्रीत जताती

॥

रहना।

॥

बोल तुम्हारे सखी घोलते

॥

जग में अमृत-रस की धारा।

॥

प्रेम-नगर बन जाती जगती

॥

समय ठहर जाता बंजारा।

॥

झाँक सकें ना ज्यों अँधियारे

॥

तुम प्रकाश बन आती

bane rahen ye din basant ke

·

geet kokilaa gaatee

·

rahanaa

·

manthar hotee gati jeewan kee

·

naee umangon se bhar jaatee

·

kund jaden bhee hoteen spandit

·

wasudhaa mand-mand musakaatee

·

dekho jog n le amaraaee

·

usase preet jataatee

·

rahanaa

·

bol tumhaare sakhee gholate

·

jag men amriit-ras kee dhaaraa

·

prem-nagar ban jaatee jagatee

·

samay thahar jaataa banjaaraa

·

jhaank saken naa jyon andhiyaare

·

tum prakaash ban aatee

बने रहें ये दिन बसंत के

॥

गीत कोकिला गाती

॥

रहना।

॥

मंथर होती गति जीवन की

॥

नई उमंगों से भर जाती।

॥

कुंद जड़ें भी होतीं स्पंदित

॥

वसुधा मंद-मंद मुसकाती।

॥

देखो जोग न ले अमराई

॥

उससे प्रीत जताती

॥

रहना।

॥

बोल तुम्हारे सखी घोलते

॥

जग में अमृत-रस की धारा।

॥

प्रेम-नगर बन जाती जगती

॥

समय ठहर जाता बंजारा।

॥

झाँक सकें ना ज्यों अँधियारे

॥

तुम प्रकाश बन आती

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗