भारत मां के अमर जवान bhaarat maan ke amar jawaan भारत मां के अमर जवान
जो दुश्मन से आंख मिलाते
सीना ताने बढ़ते जाते
कभी न पीठ दिखाते जो नर
जोश अकूत भरा हिय अंदर
डिगते कदम न तिल भर जिनके
चाहे तन हो लहूलुहान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
चाहे मां की गोद बुलाए
घरणी नयनों नीर बहाए
गूंजें संतति के विलाप भी
खींचे चाहे डोर फ़र्ज़ की
उनको दिखती सिर्फ मातृभू
जिसकी कहलाते संतान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
शीत, ताप कब उन्हें सताते
बाधाओं से नैन मिलाते
एक भाव बस मिटें देश हित
उसकी माटी को हों अर्पित
यही एक अभिलाषा उनकी
हों शहीद करके जयगान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
भूले जो संसारी सुख दुख
देश प्रेम ही उनके सम्मुख
नज़रें उनकी लक्ष्य क्षेत्र पर
ज्यों अर्जुन की मत्स्य नेत्र पर
करें बंधुओ, उन्हें नमन हम
जिनसे अपना देश महान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
jo dushman se aankh milaate
seenaa taane badh़te jaate
kabhee n peeth dikhaate jo nar
josh akoot bharaa hiy andar
digate kadam n til bhar jinake
chaahe tan ho lahooluhaan
aise weer sapoot kahaate
bhaarat maan ke amar jawaan
chaahe maan kee god bulaae
gharanee nayanon neer bahaae
goonjen santati ke wilaap bhee
kheenche chaahe dor ph़rj़ kee
unako dikhatee sirph maatriibhoo
jisakee kahalaate santaan
aise weer sapoot kahaate
bhaarat maan ke amar jawaan
sheet, taap kab unhen sataate
baadhaaon se nain milaate
ek bhaaw bas miten desh hit
usakee maatee ko hon arpit
yahee ek abhilaashaa unakee
hon shaheed karake jayagaan
aise weer sapoot kahaate
bhaarat maan ke amar jawaan
bhoole jo sansaaree sukh dukh
desh prem hee unake sammukh
naj़ren unakee lakshy kshetr par
jyon arjun kee matsy netr par
karen bandhuo, unhen naman ham
jinase apanaa desh mahaan
aise weer sapoot kahaate
bhaarat maan ke amar jawaan
जो दुश्मन से आंख मिलाते
सीना ताने बढ़ते जाते
कभी न पीठ दिखाते जो नर
जोश अकूत भरा हिय अंदर
डिगते कदम न तिल भर जिनके
चाहे तन हो लहूलुहान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
चाहे मां की गोद बुलाए
घरणी नयनों नीर बहाए
गूंजें संतति के विलाप भी
खींचे चाहे डोर फ़र्ज़ की
उनको दिखती सिर्फ मातृभू
जिसकी कहलाते संतान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
शीत, ताप कब उन्हें सताते
बाधाओं से नैन मिलाते
एक भाव बस मिटें देश हित
उसकी माटी को हों अर्पित
यही एक अभिलाषा उनकी
हों शहीद करके जयगान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान
भूले जो संसारी सुख दुख
देश प्रेम ही उनके सम्मुख
नज़रें उनकी लक्ष्य क्षेत्र पर
ज्यों अर्जुन की मत्स्य नेत्र पर
करें बंधुओ, उन्हें नमन हम
जिनसे अपना देश महान
ऐसे वीर सपूत कहाते
भारत मां के अमर जवान