कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५९ / १६३ № 159 of 163 रचना १५९ / १६३
१८ अगस्त २०२० 18 August 2020 १८ अगस्त २०२०

भारत मां के अमर जवान bhaarat maan ke amar jawaan भारत मां के अमर जवान

जो दुश्मन से आंख मिलाते

सीना ताने बढ़ते जाते

कभी न पीठ दिखाते जो नर

जोश अकूत भरा हिय अंदर

डिगते कदम न तिल भर जिनके

चाहे तन हो लहूलुहान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

चाहे मां की गोद बुलाए

घरणी नयनों नीर बहाए

गूंजें संतति के विलाप भी

खींचे चाहे डोर फ़र्ज़ की

उनको दिखती सिर्फ मातृभू

जिसकी कहलाते संतान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

शीत, ताप कब उन्हें सताते

बाधाओं से नैन मिलाते

एक भाव बस मिटें देश हित

उसकी माटी को हों अर्पित

यही एक अभिलाषा उनकी

हों शहीद करके जयगान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

भूले जो संसारी सुख दुख

देश प्रेम ही उनके सम्मुख

नज़रें उनकी लक्ष्य क्षेत्र पर

ज्यों अर्जुन की मत्स्य नेत्र पर

करें बंधुओ, उन्हें नमन हम

जिनसे अपना देश महान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

jo dushman se aankh milaate

seenaa taane badh़te jaate

kabhee n peeth dikhaate jo nar

josh akoot bharaa hiy andar

digate kadam n til bhar jinake

chaahe tan ho lahooluhaan

aise weer sapoot kahaate

bhaarat maan ke amar jawaan

·

chaahe maan kee god bulaae

gharanee nayanon neer bahaae

goonjen santati ke wilaap bhee

kheenche chaahe dor ph़rj़ kee

unako dikhatee sirph maatriibhoo

jisakee kahalaate santaan

aise weer sapoot kahaate

bhaarat maan ke amar jawaan

·

sheet, taap kab unhen sataate

baadhaaon se nain milaate

ek bhaaw bas miten desh hit

usakee maatee ko hon arpit

yahee ek abhilaashaa unakee

hon shaheed karake jayagaan

aise weer sapoot kahaate

bhaarat maan ke amar jawaan

·

bhoole jo sansaaree sukh dukh

desh prem hee unake sammukh

naj़ren unakee lakshy kshetr par

jyon arjun kee matsy netr par

karen bandhuo, unhen naman ham

jinase apanaa desh mahaan

aise weer sapoot kahaate

bhaarat maan ke amar jawaan

जो दुश्मन से आंख मिलाते

सीना ताने बढ़ते जाते

कभी न पीठ दिखाते जो नर

जोश अकूत भरा हिय अंदर

डिगते कदम न तिल भर जिनके

चाहे तन हो लहूलुहान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

चाहे मां की गोद बुलाए

घरणी नयनों नीर बहाए

गूंजें संतति के विलाप भी

खींचे चाहे डोर फ़र्ज़ की

उनको दिखती सिर्फ मातृभू

जिसकी कहलाते संतान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

शीत, ताप कब उन्हें सताते

बाधाओं से नैन मिलाते

एक भाव बस मिटें देश हित

उसकी माटी को हों अर्पित

यही एक अभिलाषा उनकी

हों शहीद करके जयगान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

भूले जो संसारी सुख दुख

देश प्रेम ही उनके सम्मुख

नज़रें उनकी लक्ष्य क्षेत्र पर

ज्यों अर्जुन की मत्स्य नेत्र पर

करें बंधुओ, उन्हें नमन हम

जिनसे अपना देश महान

ऐसे वीर सपूत कहाते

भारत मां के अमर जवान

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗