जन्मदाता हे पिता janmadaataa he pitaa जन्मदाता हे पिता
जन्मदाता हे पिता तुम भूमि पर वरदान हो
घर चमन के मुग्ध माली हम गुलों की जान हो
शक्तपालक तुम हमारे मित्र सबसे हो अहम
गर्व है तुम पर हमें जीवन की तुम पहचान हो
प्रेम संतति हित तुम्हारा, जानती बेटी पिता
फर्ज़ के कटु आवरण में, मोम सी मुस्कान हो
सद्गुणों के सार को विस्तार तुमसे ही मिला
जन्म से थे मूढ़ हम, तुम गूढ़ अन्तर्ज्ञान हो।
क्या नहीं संस्कार तुमसे, पा लिए हमने भला
तुम गुरू शिक्षक तुम्हीं, तुम वेद हो व्याख्यान हो।
पथ प्रदर्शक तुम हमारे, मंज़िलें तुमसे मिलीं
गुत्थियों का हल सरलतम, तुम गणित विज्ञान हो।
रक्ष तुमसे संगिनी, बेफिक्र है संतान भी
तुम कवच परिवार के, पुख्ता अडिग चट्टान हो।
janmadaataa he pitaa tum bhoomi par waradaan ho
ghar chaman ke mugdh maalee ham gulon kee jaan ho
shaktapaalak tum hamaare mitr sabase ho aham
garv hai tum par hamen jeewan kee tum pahachaan ho
prem santati hit tumhaaraa, jaanatee betee pitaa
pharz ke katu aawaran men, mom see muskaan ho
sadgunon ke saar ko wistaar tumase hee milaa
janm se the mooढ़ ham, tum gooढ़ antarjnaan ho
kyaa naheen sanskaar tumase, paa lie hamane bhalaa
tum guroo shikshak tumheen, tum wed ho wyaakhyaan ho
path pradarshak tum hamaare, manzilen tumase mileen
gutthiyon kaa hal saralatam, tum ganit wijnaan ho
raksh tumase sanginee, bephikr hai santaan bhee
tum kawach pariwaar ke, pukhtaa adig chattaan ho
जन्मदाता हे पिता तुम भूमि पर वरदान हो
घर चमन के मुग्ध माली हम गुलों की जान हो
शक्तपालक तुम हमारे मित्र सबसे हो अहम
गर्व है तुम पर हमें जीवन की तुम पहचान हो
प्रेम संतति हित तुम्हारा, जानती बेटी पिता
फर्ज़ के कटु आवरण में, मोम सी मुस्कान हो
सद्गुणों के सार को विस्तार तुमसे ही मिला
जन्म से थे मूढ़ हम, तुम गूढ़ अन्तर्ज्ञान हो।
क्या नहीं संस्कार तुमसे, पा लिए हमने भला
तुम गुरू शिक्षक तुम्हीं, तुम वेद हो व्याख्यान हो।
पथ प्रदर्शक तुम हमारे, मंज़िलें तुमसे मिलीं
गुत्थियों का हल सरलतम, तुम गणित विज्ञान हो।
रक्ष तुमसे संगिनी, बेफिक्र है संतान भी
तुम कवच परिवार के, पुख्ता अडिग चट्टान हो।