कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १९१ / २०४ № 191 of 204 रचना १९१ / २०४
२९ मई २०२० 29 May 2020 २९ मई २०२०

जन्मदाता हे पिता janmadaataa he pitaa जन्मदाता हे पिता

जन्मदाता हे पिता तुम  भूमि पर वरदान हो

घर चमन के मुग्ध माली  हम गुलों की जान हो

शक्तपालक तुम हमारे  मित्र सबसे हो अहम

गर्व है तुम पर हमें  जीवन की तुम पहचान हो

प्रेम संतति हित तुम्हारा,  जानती बेटी पिता

फर्ज़ के कटु आवरण में,  मोम सी मुस्कान हो

सद्गुणों के सार को  विस्तार तुमसे ही मिला

जन्म से थे मूढ़ हम, तुम गूढ़ अन्तर्ज्ञान हो।

क्या नहीं संस्कार तुमसे,  पा लिए हमने भला

तुम गुरू  शिक्षक तुम्हीं, तुम   वेद हो व्याख्यान हो।

पथ प्रदर्शक तुम हमारे,  मंज़िलें तुमसे मिलीं

गुत्थियों का हल सरलतम,  तुम गणित  विज्ञान हो।

रक्ष तुमसे संगिनी,  बेफिक्र है संतान भी

तुम कवच परिवार के,  पुख्ता अडिग चट्टान हो।

janmadaataa he pitaa tum bhoomi par waradaan ho

ghar chaman ke mugdh maalee ham gulon kee jaan ho

·

shaktapaalak tum hamaare mitr sabase ho aham

garv hai tum par hamen jeewan kee tum pahachaan ho

·

prem santati hit tumhaaraa, jaanatee betee pitaa

pharz ke katu aawaran men, mom see muskaan ho

·

sadgunon ke saar ko wistaar tumase hee milaa

janm se the mooढ़ ham, tum gooढ़ antarjnaan ho

·

kyaa naheen sanskaar tumase, paa lie hamane bhalaa

tum guroo shikshak tumheen, tum wed ho wyaakhyaan ho

·

path pradarshak tum hamaare, manzilen tumase mileen

gutthiyon kaa hal saralatam, tum ganit wijnaan ho

·

raksh tumase sanginee, bephikr hai santaan bhee

tum kawach pariwaar ke, pukhtaa adig chattaan ho

जन्मदाता हे पिता तुम  भूमि पर वरदान हो

घर चमन के मुग्ध माली  हम गुलों की जान हो

शक्तपालक तुम हमारे  मित्र सबसे हो अहम

गर्व है तुम पर हमें  जीवन की तुम पहचान हो

प्रेम संतति हित तुम्हारा,  जानती बेटी पिता

फर्ज़ के कटु आवरण में,  मोम सी मुस्कान हो

सद्गुणों के सार को  विस्तार तुमसे ही मिला

जन्म से थे मूढ़ हम, तुम गूढ़ अन्तर्ज्ञान हो।

क्या नहीं संस्कार तुमसे,  पा लिए हमने भला

तुम गुरू  शिक्षक तुम्हीं, तुम   वेद हो व्याख्यान हो।

पथ प्रदर्शक तुम हमारे,  मंज़िलें तुमसे मिलीं

गुत्थियों का हल सरलतम,  तुम गणित  विज्ञान हो।

रक्ष तुमसे संगिनी,  बेफिक्र है संतान भी

तुम कवच परिवार के,  पुख्ता अडिग चट्टान हो।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗