ज़रा सा मुस्कुराइए zaraa saa muskuraaie ज़रा सा मुस्कुराइए
है
ज़िंदगी का फलसफ़ा, ज़रा सा मुस्कुराइये
बनेगा
दर्द भी दवा, ज़रा सा मुस्कुराइये
विगत
को क्यों गले लगा, बिसूरते हैं रात दिन
बिसार
के जो हो चुका, ज़रा सा मुस्कुराइये
न
कोई श्रम न दाम है, ये मुफ्त का इनाम है
जो
रहना चाहें चिर युवा, ज़रा सा मुस्कुराइये
भुलाके
रब की रहमतें, क्यों झेलते हैं ज़हमतें
रहम
की माँगकर दुआ, ज़रा सा मुस्कुराइये
हिलाएँगे
जो होंठ तो, खिलेगा चेहरा भोर सा
कटेगा
दिन हरा-भरा, ज़रा सा मुस्कुराइये
विकल्प
तो अनेक हैं, अगर खुशी अज़ीज़ हो
तो
मान लें मेरा कहा, ज़रा सा मुस्कुराइये
जो ज़िंदगी के शेष दिन, जिएँगे हँस के “कल्पना”
ये
करके खुद से वायदा, ज़रा सा मुस्कुराइये
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
hai
zindagee kaa phalasafaa, zaraa saa muskuraaiye
banegaa
dard bhee dawaa, zaraa saa muskuraaiye
wigat
ko kyon gale lagaa, bisoorate hain raat din
bisaar
ke jo ho chukaa, zaraa saa muskuraaiye
n
koee shram n daam hai, ye mupht kaa inaam hai
jo
rahanaa chaahen chir yuwaa, zaraa saa muskuraaiye
bhulaake
rab kee rahamaten, kyon jhelate hain zahamaten
raham
kee maangakar duaa, zaraa saa muskuraaiye
hilaaenge
jo honth to, khilegaa cheharaa bhor saa
kategaa
din haraa-bharaa, zaraa saa muskuraaiye
wikalp
to anek hain, agar khushee azeez ho
to
maan len meraa kahaa, zaraa saa muskuraaiye
jo zindagee ke shesh din, jienge hans ke “kalpanaa”
ye
karake khud se waayadaa, zaraa saa muskuraaiye
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
है
ज़िंदगी का फलसफ़ा, ज़रा सा मुस्कुराइये
बनेगा
दर्द भी दवा, ज़रा सा मुस्कुराइये
विगत
को क्यों गले लगा, बिसूरते हैं रात दिन
बिसार
के जो हो चुका, ज़रा सा मुस्कुराइये
न
कोई श्रम न दाम है, ये मुफ्त का इनाम है
जो
रहना चाहें चिर युवा, ज़रा सा मुस्कुराइये
भुलाके
रब की रहमतें, क्यों झेलते हैं ज़हमतें
रहम
की माँगकर दुआ, ज़रा सा मुस्कुराइये
हिलाएँगे
जो होंठ तो, खिलेगा चेहरा भोर सा
कटेगा
दिन हरा-भरा, ज़रा सा मुस्कुराइये
विकल्प
तो अनेक हैं, अगर खुशी अज़ीज़ हो
तो
मान लें मेरा कहा, ज़रा सा मुस्कुराइये
जो ज़िंदगी के शेष दिन, जिएँगे हँस के “कल्पना”
ये
करके खुद से वायदा, ज़रा सा मुस्कुराइये
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी